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27 में से नक्षत्र 15

स्वाती नक्षत्र

स्वाति आपका जन्म नक्षत्र है, वह नक्षत्र जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। इसके देवता वायु हैं और इसका प्रतीक हवा में झूमता कोंपल है, जो स्वतंत्रता, लचीलापन, व्यापार और संतुलन की ओर संकेत करते हैं।

क्रम
15
स्वामी ग्रह
राहु
देवता
वायु
विस्तार
6°40′ तुला – 20°00′ तुला
गण
देव गण
योनि (पशु)
महिष
नामाक्षर
रू, रे, रो, ता

अपना नक्षत्र मुफ़्त जानें

स्वाती नक्षत्र का अर्थ

स्वाति आपका जन्म नक्षत्र है, वह नक्षत्र जिसमें आपके जन्म के समय चंद्रमा था। इसके देवता वायु हैं और इसका प्रतीक हवा में झूमता कोंपल है, जो स्वतंत्रता, लचीलापन, व्यापार और संतुलन की ओर संकेत करते हैं। इसे चलने, सोचने और व्यापार करने के लिए खुली जगह चाहिए; हवा में झूमते कोंपल की तरह यह झुकता है पर टूटता नहीं। इस नक्षत्र के स्वामी राहु हैं, इसलिए आपके जीवन की पहली विंशोत्तरी दशा राहु की थी, और राहु के विषय, महत्वाकांक्षा, जिज्ञासा और नए की ओर खिंचाव, आपकी भावनाओं और प्रतिक्रियाओं के निकट रहते हैं। इसका गण देव गण है: सौम्य, आदर्शवादी और लोगों में अच्छाई देखने वाला स्वभाव। कई परिवार नामकरण के लिए इस नक्षत्र के अक्षरों का उपयोग करते हैं, और इससे गिना जाने वाला तारा-चक्र शुभ दिन चुनने में काम आता है।

स्वाती नक्षत्र के नामाक्षर

स्वाती के चार चरणों के आरंभिक अक्षर रू, रे, रो, ता हैं। नक्षत्र के अनुसार नाम रखने वाले परिवार बच्चे के चरण का अक्षर चुनते हैं।

परंपरा और स्वभाव

स्वाति नक्षत्र के देवता वायु हैं। हवा में हिलता कोमल अंकुर इसका प्रतीक है; स्वतंत्रता, लचीलापन और व्यापार कौशल इसका स्वभाव है। परंपरा के अनुसार भगवान नृसिंह का प्राकट्य स्वाति नक्षत्र में हुआ। शास्त्र इसे चर नक्षत्र मानते हैं। चलने फिरने वाले कार्य, जैसे यात्रा आरंभ करना, वाहन खरीदना, बाग़बानी, स्थान परिवर्तन और नई पढ़ाई शुरू करना, इस दिन शुभ माने जाते हैं।

स्वाती से शुरू होने वाली दशा

स्वाती का स्वामी राहु है, इसलिए जीवन 18 वर्ष की राहु महादशा से शुरू होता है। राहु की महादशा अठारह वर्ष की होती है और महत्वाकांक्षा, परिवर्तन और नए या अपरिचित क्षेत्रों, जैसे तकनीक, यात्रा, विदेशी संपर्क या अलग राहों, की ओर खिंचाव लाती है। यह तेज़ी से द्वार खोलकर आपकी दुनिया बड़ी कर सकती है। इच्छाएँ प्रबल रहने से स्थिर करने वाली आदतें, ईमानदार सलाह और बड़े कदमों से पहले तथ्यों की जाँच इसे संतुलित रखती है। राहु जिस राशि में है उसके स्वामी के माध्यम से काम करता है, इसलिए इस दशा को पढ़ते समय उस ग्रह को भी देखें।

जन्म नक्षत्र कैसे निकाला जाता है

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, वही आपका जन्म नक्षत्र है। राशिचक्र 13°20′ के 27 बराबर भागों में बँटा है और हर भाग 3°20′ के चार चरणों में। चंद्रमा लगभग एक दिन में एक नक्षत्र पार करता है, इसलिए सही जन्म समय और स्थान बहुत ज़रूरी हैं। ये पृष्ठ लाहिड़ी अयनांश के साथ निरयन गणना का उपयोग करते हैं।

स्वाती का व्यावहारिक उपयोग

नामकरण, विवाह मिलान, शुभ दिन चुनना (तारा बल) और विंशोत्तरी दशा की पहली अवधि, इन सबमें जन्म नक्षत्र काम आता है। नक्षत्र कुंडली की केवल एक परत है; यहाँ दी गई बातों को निश्चित फल नहीं, प्रवृत्तियाँ समझें। पूरी कुंडली बनाने पर चंद्रमा की राशि, भाव और अन्य ग्रहों से संबंध दिखते हैं।

स्वाती से सबसे अधिक मेल खाने वाले नक्षत्र
साथी का नक्षत्रनक्षत्र पोरुथमअष्टकूट अंक (नक्षत्र आधारित)
आश्लेषा5/79/21
रेवती5/79/21
भरणी4/79/21
रोहिणी4/79/21
मृगशिरा4/79/21
पुनर्वसु4/79/21

सामान्य प्रश्न

स्वाती नक्षत्र का स्वामी कौन है?

स्वाती नक्षत्र का स्वामी राहु है। इसलिए इस नक्षत्र में जन्मे लोगों का जीवन राहु की दशा से शुरू होता है; पूरी दशा 18 वर्ष की है और जन्म के समय बचा भाग चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करता है।

स्वाती नक्षत्र के देवता कौन हैं?

स्वाती नक्षत्र के अधिदेवता वायु हैं। शास्त्र नक्षत्र के स्वभाव को समझाने के लिए देवता का प्रयोग करते हैं।

स्वाती किस राशि में आता है?

स्वाती 6°40′ तुला – 20°00′ तुला तक फैला है, इसलिए यह तुला राशि में आता है। दो राशियों में फैले नक्षत्र में चरण से राशि तय होती है।

स्वाती नक्षत्र के नामाक्षर क्या हैं?

स्वाती के चार चरणों के आरंभिक अक्षर हैं: रू, रे, रो, ता। परिवार की परंपरा के अनुसार वर्तनी थोड़ी बदल सकती है।

स्वाती नक्षत्र का गण क्या है?

स्वाती देव गण का नक्षत्र है। विवाह मिलान में गण कूट स्वभाव की तुलना करता है।

विवाह के लिए स्वाती से कौन से नक्षत्र मेल खाते हैं?

इस पृष्ठ की तालिका साथी नक्षत्रों को इस आधार पर क्रम देती है कि सात नक्षत्र पोरुथम में से कितने मिलते हैं और अष्टकूट अंक कितने हैं। पूरे मिलान के लिए दोनों की राशि, रज्जु, वेध और पूरी कुंडली भी देखी जाती है।

क्या स्वाती शुभ नक्षत्र है?

कोई नक्षत्र अपने आप में शुभ या अशुभ नहीं होता। हर नक्षत्र की अपनी शक्तियाँ और सीख हैं; कुंडली के बाकी योग तय करते हैं कि वे कैसे प्रकट होंगी।

कैसे जानें कि मेरा नक्षत्र स्वाती है?

मुफ़्त कुंडली में अपनी जन्म तिथि, सही समय और स्थान डालें। चंद्रमा का नक्षत्र, चरण और वर्तमान दशा दिखाई देगी।

क्या लाहिड़ी या KP अयनांश से नक्षत्र बदल सकता है?

लाहिड़ी और कृष्णमूर्ति (KP) मानों में कुछ कला का ही अंतर है; नक्षत्र तभी बदल सकता है जब चंद्रमा दो नक्षत्रों की सीमा पर हो।

जब चंद्रमा स्वाती में गोचर करे तो क्या करें?

लगभग हर 27 दिन में आने वाला यह दिन जन्म नक्षत्र दिवस है। कई लोग इस दिन बड़े आरंभ टालकर पूजा और शांत काम करते हैं; पंचांग में यह दिन देख सकते हैं।

यह नक्षत्र किस श्रेणी का है?

यह चर नक्षत्र है। चंद्रमा जब इस नक्षत्र में हो, उस दिन कोई कार्य आरंभ करने से पहले पंचांग में तिथि, वार और राहु काल भी देखना चाहिए।

इस नक्षत्र के दिन क्या करना शुभ है?

यात्रा, स्थान परिवर्तन और नए प्रयासों के लिए यह दिन अच्छा है। जन्म नक्षत्र के दिन विष्णु सहस्रनाम का पाठ और ज़रूरतमंदों को भोजन कराना परंपरा है; यात्रा से पहले गणेश जी को प्रणाम करें।