दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, सोम, 1 अप्रैल 2030
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:49 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग शुभ और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 7:22 – सुबह 8:56 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:49
- सूर्यास्त
- शाम 6:14
- तिथि
- चतुर्दशी · रात 2:11 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद · रात 9:16 तक
- योग
- शुभ
- करण
- विष्टि
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:22 – सुबह 8:56
- यमगंड
- सुबह 10:29 – दोपहर 12:02
- गुलिक काल
- दोपहर 1:35 – दोपहर 3:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:31 – दोपहर 12:19
- अमृत काल
- सुबह 6:36 – सुबह 8:09
आज वाराणसी में
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:49 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग शुभ और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 7:22 – सुबह 8:56 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 2 अप्रैल 2030 | अमावस्या | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 3:08 – शाम 4:41 |
| बुध, 3 अप्रैल 2030 | प्रतिपदा | रेवती | दोपहर 12:01 – दोपहर 1:35 |
| गुरु, 4 अप्रैल 2030 | द्वितीया | अश्विनी | दोपहर 1:34 – दोपहर 3:08 |
| शुक्र, 5 अप्रैल 2030 | द्वितीया | भरणी | सुबह 10:27 – दोपहर 12:01 |
| शनि, 6 अप्रैल 2030 | तृतीया | भरणी | सुबह 8:52 – सुबह 10:26 |
| रवि, 7 अप्रैल 2030 | चतुर्थी | कृत्तिका | शाम 4:43 – शाम 6:17 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी है; रात 2:11 तक।
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है; रात 9:16 तक।
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल सुबह 7:22 – सुबह 8:56 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 1 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:49 और सूर्यास्त शाम 6:14 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।