दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, बुध, 27 मार्च 2030
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा, योग वरीयान और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 12:03 – दोपहर 1:35 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:55
- सूर्यास्त
- शाम 6:12
- तिथि
- नवमी · रात 1:31 तक
- नक्षत्र
- पूर्वाषाढ़ा · शाम 5:58 तक
- योग
- वरीयान
- करण
- तैतिल
- वार
- बुधवार
- राहु काल
- दोपहर 12:03 – दोपहर 1:35
- यमगंड
- सुबह 7:27 – सुबह 8:59
- गुलिक काल
- सुबह 10:31 – दोपहर 12:03
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:32 – दोपहर 12:20
- अमृत काल
- सुबह 9:45 – सुबह 11:17
आज वाराणसी में
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा, योग वरीयान और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 12:03 – दोपहर 1:35 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| गुरु, 28 मार्च 2030 | दशमी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 1:35 – दोपहर 3:08 |
| शुक्र, 29 मार्च 2030 | एकादशी | श्रवण | सुबह 10:30 – दोपहर 12:03 |
| शनि, 30 मार्च 2030 | द्वादशी | धनिष्ठा | सुबह 8:57 – सुबह 10:30 |
| रवि, 31 मार्च 2030 | त्रयोदशी | शतभिषा | शाम 4:41 – शाम 6:14 |
| सोम, 1 अप्रैल 2030 | चतुर्दशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 7:22 – सुबह 8:56 |
| मंगल, 2 अप्रैल 2030 | अमावस्या | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 3:08 – शाम 4:41 |
सामान्य प्रश्न
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि नवमी है; रात 1:31 तक।
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा है; शाम 5:58 तक।
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल दोपहर 12:03 – दोपहर 1:35 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
बुध, 27 मार्च 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:55 और सूर्यास्त शाम 6:12 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।