दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, शनि, 11 अगस्त 2029
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र मघा, योग वरीयान और करण बालव है। राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:29
- सूर्यास्त
- शाम 6:36
- तिथि
- द्वितीया · रात 2:39 तक
- नक्षत्र
- मघा · शाम 4:53 तक
- योग
- वरीयान
- करण
- बालव
- वार
- शनिवार
- राहु काल
- सुबह 8:46 – सुबह 10:24
- यमगंड
- दोपहर 1:41 – दोपहर 3:19
- गुलिक काल
- तड़के 5:29 – सुबह 7:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- दोपहर 2:30 – शाम 4:08
आज वाराणसी में
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र मघा, योग वरीयान और करण बालव है। राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| रवि, 12 अगस्त 2029 | तृतीया | पूर्वा फाल्गुनी | शाम 4:57 – शाम 6:35 |
| सोम, 13 अगस्त 2029 | चतुर्थी | उत्तरा फाल्गुनी | सुबह 7:08 – सुबह 8:46 |
| मंगल, 14 अगस्त 2029 | पंचमी | हस्त | दोपहर 3:18 – शाम 4:56 |
| बुध, 15 अगस्त 2029 | षष्ठी | चित्रा | दोपहर 12:02 – दोपहर 1:40 |
| गुरु, 16 अगस्त 2029 | सप्तमी | स्वाती | दोपहर 1:39 – दोपहर 3:17 |
| शुक्र, 17 अगस्त 2029 | अष्टमी | विशाखा | सुबह 10:24 – दोपहर 12:01 |
सामान्य प्रश्न
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; रात 2:39 तक।
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मघा है; शाम 4:53 तक।
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शनि, 11 अगस्त 2029 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:29 और सूर्यास्त शाम 6:36 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।