दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 15 नवंबर 2032
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:25 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र रेवती, योग वज्र और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:47 – सुबह 9:08 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:25
- सूर्यास्त
- शाम 5:15
- तिथि
- त्रयोदशी · शाम 4:13 तक
- नक्षत्र
- रेवती · सुबह 7:17 तक
- योग
- वज्र
- करण
- तैतिल
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:47 – सुबह 9:08
- यमगंड
- सुबह 10:29 – सुबह 11:50
- गुलिक काल
- दोपहर 1:11 – दोपहर 2:33
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:23 – दोपहर 12:11
- अमृत काल
- सुबह 7:06 – सुबह 8:27
आज लखनऊ में
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:25 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी, नक्षत्र रेवती, योग वज्र और करण तैतिल है। राहु काल सुबह 7:47 – सुबह 9:08 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 16 नवंबर 2032 | चतुर्दशी | अश्विनी | दोपहर 2:32 – दोपहर 3:54 |
| बुध, 17 नवंबर 2032 | पूर्णिमा | कृत्तिका | सुबह 11:51 – दोपहर 1:11 |
| गुरु, 18 नवंबर 2032 | प्रतिपदा | रोहिणी | दोपहर 1:12 – दोपहर 2:32 |
| शुक्र, 19 नवंबर 2032 | द्वितीया | मृगशिरा | सुबह 10:30 – सुबह 11:51 |
| शनि, 20 नवंबर 2032 | तृतीया | आर्द्रा | सुबह 9:10 – सुबह 10:31 |
| रवि, 21 नवंबर 2032 | चतुर्थी | पुनर्वसु | दोपहर 3:53 – शाम 5:13 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि त्रयोदशी है; शाम 4:13 तक।
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रेवती है; सुबह 7:17 तक।
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 7:47 – सुबह 9:08 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 15 नवंबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:25 और सूर्यास्त शाम 5:15 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।