दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 11 अक्टूबर 2032
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:03 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मूल, योग सौभाग्य और करण गर है। राहु काल सुबह 7:30 – सुबह 8:58 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:03
- सूर्यास्त
- शाम 5:41
- तिथि
- सप्तमी · रात 10:01 तक
- नक्षत्र
- मूल · दोपहर 12:45 तक
- योग
- सौभाग्य
- करण
- गर
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:30 – सुबह 8:58
- यमगंड
- सुबह 10:25 – सुबह 11:52
- गुलिक काल
- दोपहर 1:19 – दोपहर 2:47
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:23 – दोपहर 12:11
- अमृत काल
- सुबह 6:47 – सुबह 8:14
आज लखनऊ में
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:03 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मूल, योग सौभाग्य और करण गर है। राहु काल सुबह 7:30 – सुबह 8:58 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 12 अक्टूबर 2032 | अष्टमी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 2:46 – शाम 4:13 |
| बुध, 13 अक्टूबर 2032 | नवमी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 11:52 – दोपहर 1:19 |
| गुरु, 14 अक्टूबर 2032 | दशमी | श्रवण | दोपहर 1:18 – दोपहर 2:45 |
| शुक्र, 15 अक्टूबर 2032 | एकादशी | धनिष्ठा | सुबह 10:25 – सुबह 11:51 |
| शनि, 16 अक्टूबर 2032 | द्वादशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 8:58 – सुबह 10:25 |
| रवि, 17 अक्टूबर 2032 | त्रयोदशी | उत्तरा भाद्रपद | शाम 4:09 – शाम 5:35 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; रात 10:01 तक।
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मूल है; दोपहर 12:45 तक।
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 7:30 – सुबह 8:58 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 11 अक्टूबर 2032 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:03 और सूर्यास्त शाम 5:41 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।