दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, मंगल, 29 जुलाई 2031
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र विशाखा, योग शुभ और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 3:34 – शाम 5:15 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:29
- सूर्यास्त
- शाम 6:56
- तिथि
- दशमी · रात 12:13 तक
- नक्षत्र
- विशाखा · सुबह 9:12 तक
- योग
- शुभ
- करण
- तैतिल
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:34 – शाम 5:15
- यमगंड
- सुबह 8:50 – सुबह 10:31
- गुलिक काल
- दोपहर 12:12 – दोपहर 1:53
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:38 – दोपहर 12:26
- अमृत काल
- सुबह 8:00 – सुबह 9:41
आज लखनऊ में
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र विशाखा, योग शुभ और करण तैतिल है। राहु काल दोपहर 3:34 – शाम 5:15 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 30 जुलाई 2031 | एकादशी | अनुराधा | दोपहर 12:12 – दोपहर 1:53 |
| गुरु, 31 जुलाई 2031 | द्वादशी | ज्येष्ठा | दोपहर 1:53 – दोपहर 3:33 |
| शुक्र, 1 अगस्त 2031 | त्रयोदशी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 10:31 – दोपहर 12:12 |
| शनि, 2 अगस्त 2031 | चतुर्दशी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 8:51 – सुबह 10:32 |
| रवि, 3 अगस्त 2031 | पूर्णिमा | श्रवण | शाम 5:12 – शाम 6:53 |
| सोम, 4 अगस्त 2031 | द्वितीया | धनिष्ठा | सुबह 7:12 – सुबह 8:52 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि दशमी है; रात 12:13 तक।
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र विशाखा है; सुबह 9:12 तक।
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 3:34 – शाम 5:15 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 29 जुलाई 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:29 और सूर्यास्त शाम 6:56 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।