दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 3 अगस्त 2031
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र श्रवण, योग प्रीति और करण बव है। राहु काल शाम 5:12 – शाम 6:53 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:31
- सूर्यास्त
- शाम 6:53
- तिथि
- पूर्णिमा · सुबह 7:15 तक
- नक्षत्र
- श्रवण · शाम 6:26 तक
- योग
- प्रीति
- करण
- बव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 5:12 – शाम 6:53
- यमगंड
- दोपहर 12:12 – दोपहर 1:52
- गुलिक काल
- दोपहर 3:32 – शाम 5:12
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:38 – दोपहर 12:26
- अमृत काल
- दोपहर 1:02 – दोपहर 2:42
आज लखनऊ में
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र श्रवण, योग प्रीति और करण बव है। राहु काल शाम 5:12 – शाम 6:53 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 4 अगस्त 2031 | द्वितीया | धनिष्ठा | सुबह 7:12 – सुबह 8:52 |
| मंगल, 5 अगस्त 2031 | तृतीया | शतभिषा | दोपहर 3:31 – शाम 5:11 |
| बुध, 6 अगस्त 2031 | चतुर्थी | पूर्वा भाद्रपद | दोपहर 12:12 – दोपहर 1:51 |
| गुरु, 7 अगस्त 2031 | पंचमी | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 1:51 – दोपहर 3:31 |
| शुक्र, 8 अगस्त 2031 | षष्ठी | रेवती | सुबह 10:32 – दोपहर 12:11 |
| शनि, 9 अगस्त 2031 | सप्तमी | अश्विनी | सुबह 8:53 – सुबह 10:32 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; सुबह 7:15 तक।
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र श्रवण है; शाम 6:26 तक।
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल शाम 5:12 – शाम 6:53 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 3 अगस्त 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:31 और सूर्यास्त शाम 6:53 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।