दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, शुक्र, 14 मार्च 2031
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:17 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र विशाखा, योग व्याघात और करण गर है। राहु काल सुबह 10:46 – दोपहर 12:15 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:17
- सूर्यास्त
- शाम 6:14
- तिथि
- षष्ठी · रात 3:00 तक
- नक्षत्र
- विशाखा · दोपहर 12:24 तक
- योग
- व्याघात
- करण
- गर
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 10:46 – दोपहर 12:15
- यमगंड
- दोपहर 3:14 – शाम 4:44
- गुलिक काल
- सुबह 7:46 – सुबह 9:16
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:45 – दोपहर 12:33
- अमृत काल
- दोपहर 1:00 – दोपहर 2:30
आज लखनऊ में
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:17 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र विशाखा, योग व्याघात और करण गर है। राहु काल सुबह 10:46 – दोपहर 12:15 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 15 मार्च 2031 | सप्तमी | अनुराधा | सुबह 9:15 – सुबह 10:45 |
| रवि, 16 मार्च 2031 | अष्टमी | ज्येष्ठा | शाम 4:45 – शाम 6:15 |
| सोम, 17 मार्च 2031 | नवमी | मूल | सुबह 7:44 – सुबह 9:14 |
| मंगल, 18 मार्च 2031 | दशमी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 3:15 – शाम 4:45 |
| बुध, 19 मार्च 2031 | एकादशी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 12:14 – दोपहर 1:44 |
| गुरु, 20 मार्च 2031 | द्वादशी | धनिष्ठा | दोपहर 1:44 – दोपहर 3:15 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि षष्ठी है; रात 3:00 तक।
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र विशाखा है; दोपहर 12:24 तक।
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 10:46 – दोपहर 12:15 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 14 मार्च 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:17 और सूर्यास्त शाम 6:14 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।