दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, रवि, 29 दिसंबर 2030
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:54 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र शतभिषा, योग वज्र और करण बालव है। राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:22 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:54
- सूर्यास्त
- शाम 5:22
- तिथि
- पंचमी · सुबह 8:14 तक
- नक्षत्र
- शतभिषा · रात 8:16 तक
- योग
- वज्र
- करण
- बालव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:03 – शाम 5:22
- यमगंड
- दोपहर 12:08 – दोपहर 1:26
- गुलिक काल
- दोपहर 2:45 – शाम 4:03
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:41 – दोपहर 12:29
- अमृत काल
- दोपहर 12:47 – दोपहर 2:05
आज लखनऊ में
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:54 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र शतभिषा, योग वज्र और करण बालव है। राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:22 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 30 दिसंबर 2030 | षष्ठी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 8:12 – सुबह 9:31 |
| मंगल, 31 दिसंबर 2030 | सप्तमी | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 2:46 – शाम 4:04 |
| बुध, 1 जनवरी 2031 | अष्टमी | रेवती | दोपहर 12:09 – दोपहर 1:28 |
| गुरु, 2 जनवरी 2031 | नवमी | अश्विनी | दोपहर 1:28 – दोपहर 2:47 |
| शुक्र, 3 जनवरी 2031 | दशमी | भरणी | सुबह 10:51 – दोपहर 12:10 |
| शनि, 4 जनवरी 2031 | एकादशी | कृत्तिका | सुबह 9:33 – सुबह 10:52 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; सुबह 8:14 तक।
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र शतभिषा है; रात 8:16 तक।
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:22 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 29 दिसंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:54 और सूर्यास्त शाम 5:22 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।