दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, शुक्र, 3 जनवरी 2031
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र भरणी, योग शिव और करण गर है। राहु काल सुबह 10:51 – दोपहर 12:10 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:55
- सूर्यास्त
- शाम 5:25
- तिथि
- दशमी · सुबह 10:53 तक
- नक्षत्र
- भरणी · रात 3:39 तक
- योग
- शिव
- करण
- गर
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 10:51 – दोपहर 12:10
- यमगंड
- दोपहर 2:48 – शाम 4:06
- गुलिक काल
- सुबह 8:14 – सुबह 9:33
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:44 – दोपहर 12:32
- अमृत काल
- दोपहर 12:49 – दोपहर 2:08
आज लखनऊ में
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:55 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि दशमी, नक्षत्र भरणी, योग शिव और करण गर है। राहु काल सुबह 10:51 – दोपहर 12:10 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 4 जनवरी 2031 | एकादशी | कृत्तिका | सुबह 9:33 – सुबह 10:52 |
| रवि, 5 जनवरी 2031 | द्वादशी | कृत्तिका | शाम 4:08 – शाम 5:27 |
| सोम, 6 जनवरी 2031 | त्रयोदशी | रोहिणी | सुबह 8:15 – सुबह 9:34 |
| मंगल, 7 जनवरी 2031 | चतुर्दशी | मृगशिरा | दोपहर 2:50 – शाम 4:09 |
| बुध, 8 जनवरी 2031 | पूर्णिमा | आर्द्रा | दोपहर 12:12 – दोपहर 1:31 |
| गुरु, 9 जनवरी 2031 | प्रतिपदा | पुनर्वसु | दोपहर 1:32 – दोपहर 2:51 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि दशमी है; सुबह 10:53 तक।
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र भरणी है; रात 3:39 तक।
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 10:51 – दोपहर 12:10 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 3 जनवरी 2031 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:55 और सूर्यास्त शाम 5:25 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।