दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, शुक्र, 15 नवंबर 2030
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:25 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग सिद्ध और करण कौलव है। राहु काल सुबह 10:29 – सुबह 11:50 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:25
- सूर्यास्त
- शाम 5:15
- तिथि
- पंचमी · रात 9:47 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · सुबह 6:23 तक
- योग
- सिद्ध
- करण
- कौलव
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 10:29 – सुबह 11:50
- यमगंड
- दोपहर 2:33 – दोपहर 3:54
- गुलिक काल
- सुबह 7:46 – सुबह 9:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:23 – दोपहर 12:11
- अमृत काल
- दोपहर 12:31 – दोपहर 1:52
आज लखनऊ में
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय सुबह 6:25 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग सिद्ध और करण कौलव है। राहु काल सुबह 10:29 – सुबह 11:50 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 16 नवंबर 2030 | षष्ठी | पुनर्वसु | सुबह 9:08 – सुबह 10:29 |
| रवि, 17 नवंबर 2030 | सप्तमी | पुष्य | दोपहर 3:53 – शाम 5:14 |
| सोम, 18 नवंबर 2030 | अष्टमी | आश्लेषा | सुबह 7:48 – सुबह 9:09 |
| मंगल, 19 नवंबर 2030 | नवमी | मघा | दोपहर 2:32 – दोपहर 3:53 |
| बुध, 20 नवंबर 2030 | दशमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 11:51 – दोपहर 1:12 |
| गुरु, 21 नवंबर 2030 | एकादशी | उत्तरा फाल्गुनी | दोपहर 1:12 – दोपहर 2:32 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; रात 9:47 तक।
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; सुबह 6:23 तक।
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 10:29 – सुबह 11:50 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 15 नवंबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:25 और सूर्यास्त शाम 5:15 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।