दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, गुरु, 3 अक्टूबर 2030
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:59 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मूल, योग आयुष्मान और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:23 – दोपहर 2:52 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:59
- सूर्यास्त
- शाम 5:50
- तिथि
- सप्तमी · रात 10:25 तक
- नक्षत्र
- मूल · रात 3:41 तक
- योग
- आयुष्मान
- करण
- गर
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:23 – दोपहर 2:52
- यमगंड
- तड़के 5:59 – सुबह 7:28
- गुलिक काल
- सुबह 8:57 – सुबह 10:26
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:25 – दोपहर 12:13
- अमृत काल
- सुबह 11:10 – दोपहर 12:39
आज लखनऊ में
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:59 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मूल, योग आयुष्मान और करण गर है। राहु काल दोपहर 1:23 – दोपहर 2:52 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 4 अक्टूबर 2030 | अष्टमी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 10:26 – सुबह 11:54 |
| शनि, 5 अक्टूबर 2030 | नवमी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 8:57 – सुबह 10:25 |
| रवि, 6 अक्टूबर 2030 | दशमी | श्रवण | शाम 4:19 – शाम 5:47 |
| सोम, 7 अक्टूबर 2030 | एकादशी | धनिष्ठा | सुबह 7:29 – सुबह 8:57 |
| मंगल, 8 अक्टूबर 2030 | द्वादशी | शतभिषा | दोपहर 2:49 – शाम 4:17 |
| बुध, 9 अक्टूबर 2030 | त्रयोदशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 11:53 – दोपहर 1:21 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; रात 10:25 तक।
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मूल है; रात 3:41 तक।
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल दोपहर 1:23 – दोपहर 2:52 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 3 अक्टूबर 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:59 और सूर्यास्त शाम 5:50 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।