दैनिक पंचांग
लखनऊ पंचांग, सोम, 20 मई 2030
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र मूल, योग सिद्ध और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 6:58 – सुबह 8:39 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:16
- सूर्यास्त
- शाम 6:49
- तिथि
- तृतीया · सुबह 6:06 तक
- नक्षत्र
- मूल · सुबह 10:15 तक
- योग
- सिद्ध
- करण
- विष्टि
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 6:58 – सुबह 8:39
- यमगंड
- सुबह 10:21 – दोपहर 12:02
- गुलिक काल
- दोपहर 1:44 – दोपहर 3:26
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:28 – दोपहर 12:16
- अमृत काल
- सुबह 6:07 – सुबह 7:48
आज लखनऊ में
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में सूर्योदय तड़के 5:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र मूल, योग सिद्ध और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 6:58 – सुबह 8:39 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल लखनऊ के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 21 मई 2030 | पंचमी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 3:26 – शाम 5:08 |
| बुध, 22 मई 2030 | षष्ठी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 12:03 – दोपहर 1:44 |
| गुरु, 23 मई 2030 | सप्तमी | श्रवण | दोपहर 1:45 – दोपहर 3:27 |
| शुक्र, 24 मई 2030 | अष्टमी | धनिष्ठा | सुबह 10:21 – दोपहर 12:03 |
| शनि, 25 मई 2030 | नवमी | शतभिषा | सुबह 8:38 – सुबह 10:21 |
| रवि, 26 मई 2030 | दशमी | पूर्वा भाद्रपद | शाम 5:10 – शाम 6:52 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; सुबह 6:06 तक।
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मूल है; सुबह 10:15 तक।
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में राहु काल कब है?
लखनऊ में राहु काल सुबह 6:58 – सुबह 8:39 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 20 मई 2030 को लखनऊ में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:16 और सूर्यास्त शाम 6:49 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।