दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, गुरु, 18 मार्च 2032
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:42 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मृगशिरा, योग प्रीति और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 1:15 – दोपहर 2:45 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:42
- सूर्यास्त
- शाम 5:47
- तिथि
- सप्तमी · दोपहर 1:39 तक
- नक्षत्र
- मृगशिरा · सुबह 6:41 तक
- योग
- प्रीति
- करण
- वणिज
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:15 – दोपहर 2:45
- यमगंड
- तड़के 5:42 – सुबह 7:12
- गुलिक काल
- सुबह 8:43 – सुबह 10:14
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:14 – दोपहर 12:02
- अमृत काल
- सुबह 10:59 – दोपहर 12:29
आज कोलकाता में
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:42 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र मृगशिरा, योग प्रीति और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 1:15 – दोपहर 2:45 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 19 मार्च 2032 | अष्टमी | मृगशिरा | सुबह 10:13 – सुबह 11:44 |
| शनि, 20 मार्च 2032 | नवमी | आर्द्रा | सुबह 8:42 – सुबह 10:13 |
| रवि, 21 मार्च 2032 | दशमी | पुनर्वसु | शाम 4:17 – शाम 5:48 |
| सोम, 22 मार्च 2032 | एकादशी | पुष्य | सुबह 7:09 – सुबह 8:41 |
| मंगल, 23 मार्च 2032 | द्वादशी | आश्लेषा | दोपहर 2:46 – शाम 4:17 |
| बुध, 24 मार्च 2032 | त्रयोदशी | मघा | सुबह 11:42 – दोपहर 1:14 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; दोपहर 1:39 तक।
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मृगशिरा है; सुबह 6:41 तक।
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल दोपहर 1:15 – दोपहर 2:45 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 18 मार्च 2032 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:42 और सूर्यास्त शाम 5:47 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।