सामग्री पर जाएँ

दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, शुक्र, 29 मार्च 2030

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:32 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र श्रवण, योग शिव और करण बव है। राहु काल सुबह 10:09 – सुबह 11:41 है।

सूर्योदय
तड़के 5:32
सूर्यास्त
शाम 5:50
तिथि
एकादशी · रात 12:35 तक
नक्षत्र
श्रवण · शाम 6:06 तक
योग
शिव
करण
बव
वार
शुक्रवार
राहु काल
सुबह 10:09 – सुबह 11:41
यमगंड
दोपहर 2:46 – शाम 4:18
गुलिक काल
सुबह 7:04 – सुबह 8:36
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:10 – सुबह 11:58
अमृत काल
दोपहर 12:27 – दोपहर 1:59

पूरा पंचांग खोलें

आज कोलकाता में

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:32 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र श्रवण, योग शिव और करण बव है। राहु काल सुबह 10:09 – सुबह 11:41 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
शनि, 30 मार्च 2030द्वादशीधनिष्ठासुबह 8:36 – सुबह 10:08
रवि, 31 मार्च 2030त्रयोदशीशतभिषाशाम 4:18 – शाम 5:51
सोम, 1 अप्रैल 2030चतुर्दशीपूर्वा भाद्रपदसुबह 7:02 – सुबह 8:35
मंगल, 2 अप्रैल 2030अमावस्याउत्तरा भाद्रपददोपहर 2:46 – शाम 4:19
बुध, 3 अप्रैल 2030प्रतिपदारेवतीसुबह 11:40 – दोपहर 1:13
गुरु, 4 अप्रैल 2030द्वितीयाअश्विनीदोपहर 1:13 – दोपहर 2:46

सामान्य प्रश्न

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि एकादशी है; रात 12:35 तक।

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र श्रवण है; शाम 6:06 तक।

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल सुबह 10:09 – सुबह 11:41 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

शुक्र, 29 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय तड़के 5:32 और सूर्यास्त शाम 5:50 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।