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दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, मंगल, 2 अप्रैल 2030

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:28 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग शुक्ल और करण चतुष्पद है। राहु काल दोपहर 2:46 – शाम 4:19 है।

सूर्योदय
तड़के 5:28
सूर्यास्त
शाम 5:52
तिथि
अमावस्या · रात 3:32 तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद · रात 11:07 तक
योग
शुक्ल
करण
चतुष्पद
वार
मंगलवार
राहु काल
दोपहर 2:46 – शाम 4:19
यमगंड
सुबह 8:34 – सुबह 10:07
गुलिक काल
सुबह 11:40 – दोपहर 1:13
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:09 – सुबह 11:57
अमृत काल
सुबह 7:47 – सुबह 9:20

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आज कोलकाता में

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:28 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अमावस्या, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग शुक्ल और करण चतुष्पद है। राहु काल दोपहर 2:46 – शाम 4:19 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
बुध, 3 अप्रैल 2030प्रतिपदारेवतीसुबह 11:40 – दोपहर 1:13
गुरु, 4 अप्रैल 2030द्वितीयाअश्विनीदोपहर 1:13 – दोपहर 2:46
शुक्र, 5 अप्रैल 2030द्वितीयाभरणीसुबह 10:06 – सुबह 11:39
शनि, 6 अप्रैल 2030तृतीयाभरणीसुबह 8:31 – सुबह 10:05
रवि, 7 अप्रैल 2030चतुर्थीकृत्तिकाशाम 4:20 – शाम 5:53
सोम, 8 अप्रैल 2030पंचमीरोहिणीसुबह 6:56 – सुबह 8:30

सामान्य प्रश्न

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि अमावस्या है; रात 3:32 तक।

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है; रात 11:07 तक।

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल दोपहर 2:46 – शाम 4:19 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

मंगल, 2 अप्रैल 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय तड़के 5:28 और सूर्यास्त शाम 5:52 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।