दैनिक पंचांग
कोलकाता पंचांग, बुध, 13 मार्च 2030
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:47 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र मृगशिरा, योग प्रीति और करण बालव है। राहु काल सुबह 11:46 – दोपहर 1:15 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:47
- सूर्यास्त
- शाम 5:44
- तिथि
- नवमी · तड़के 5:07 तक
- नक्षत्र
- मृगशिरा · सुबह 8:30 तक
- योग
- प्रीति
- करण
- बालव
- वार
- बुधवार
- राहु काल
- सुबह 11:46 – दोपहर 1:15
- यमगंड
- सुबह 7:17 – सुबह 8:46
- गुलिक काल
- सुबह 10:16 – सुबह 11:46
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:16 – दोपहर 12:04
- अमृत काल
- सुबह 9:31 – सुबह 11:01
आज कोलकाता में
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:47 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि नवमी, नक्षत्र मृगशिरा, योग प्रीति और करण बालव है। राहु काल सुबह 11:46 – दोपहर 1:15 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| गुरु, 14 मार्च 2030 | दशमी | आर्द्रा | दोपहर 1:15 – दोपहर 2:45 |
| शुक्र, 15 मार्च 2030 | दशमी | पुनर्वसु | सुबह 10:15 – सुबह 11:45 |
| शनि, 16 मार्च 2030 | एकादशी | पुष्य | सुबह 8:45 – सुबह 10:15 |
| रवि, 17 मार्च 2030 | द्वादशी | आश्लेषा | शाम 4:16 – शाम 5:46 |
| सोम, 18 मार्च 2030 | चतुर्दशी | मघा | सुबह 7:13 – सुबह 8:43 |
| मंगल, 19 मार्च 2030 | पूर्णिमा | पूर्वा फाल्गुनी | दोपहर 2:45 – शाम 4:16 |
सामान्य प्रश्न
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि नवमी है; तड़के 5:07 तक।
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मृगशिरा है; सुबह 8:30 तक।
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?
कोलकाता में राहु काल सुबह 11:46 – दोपहर 1:15 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
बुध, 13 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:47 और सूर्यास्त शाम 5:44 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।