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दैनिक पंचांग

कोलकाता पंचांग, रवि, 17 मार्च 2030

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:43 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र आश्लेषा, योग अतिगण्ड और करण बालव है। राहु काल शाम 4:16 – शाम 5:46 है।

सूर्योदय
तड़के 5:43
सूर्यास्त
शाम 5:46
तिथि
द्वादशी · तड़के 5:37 तक
नक्षत्र
आश्लेषा · दोपहर 12:21 तक
योग
अतिगण्ड
करण
बालव
वार
रविवार
राहु काल
शाम 4:16 – शाम 5:46
यमगंड
सुबह 11:45 – दोपहर 1:15
गुलिक काल
दोपहर 2:45 – शाम 4:16
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:14 – दोपहर 12:02
अमृत काल
दोपहर 12:30 – दोपहर 2:00

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आज कोलकाता में

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय तड़के 5:43 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र आश्लेषा, योग अतिगण्ड और करण बालव है। राहु काल शाम 4:16 – शाम 5:46 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल कोलकाता के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

कोलकाता – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
सोम, 18 मार्च 2030चतुर्दशीमघासुबह 7:13 – सुबह 8:43
मंगल, 19 मार्च 2030पूर्णिमापूर्वा फाल्गुनीदोपहर 2:45 – शाम 4:16
बुध, 20 मार्च 2030प्रतिपदाउत्तरा फाल्गुनीसुबह 11:44 – दोपहर 1:15
गुरु, 21 मार्च 2030द्वितीयाहस्तदोपहर 1:14 – दोपहर 2:45
शुक्र, 22 मार्च 2030तृतीयास्वातीसुबह 10:12 – सुबह 11:43
शनि, 23 मार्च 2030चतुर्थीविशाखासुबह 8:40 – सुबह 10:12

सामान्य प्रश्न

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; तड़के 5:37 तक।

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र आश्लेषा है; दोपहर 12:21 तक।

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में राहु काल कब है?

कोलकाता में राहु काल शाम 4:16 – शाम 5:46 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

रवि, 17 मार्च 2030 को कोलकाता में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय तड़के 5:43 और सूर्यास्त शाम 5:46 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।