दैनिक पंचांग
हैदराबाद पंचांग, रवि, 30 मई 2032
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में सूर्योदय तड़के 5:41 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र श्रवण, योग ब्रह्म और करण गर है। राहु काल शाम 5:08 – शाम 6:46 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:41
- सूर्यास्त
- शाम 6:46
- तिथि
- षष्ठी · शाम 5:52 तक
- नक्षत्र
- श्रवण · सुबह 11:10 तक
- योग
- ब्रह्म
- करण
- गर
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 5:08 – शाम 6:46
- यमगंड
- दोपहर 12:13 – दोपहर 1:51
- गुलिक काल
- दोपहर 3:30 – शाम 5:08
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:40 – दोपहर 12:28
- अमृत काल
- दोपहर 1:02 – दोपहर 2:40
आज हैदराबाद में
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में सूर्योदय तड़के 5:41 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि षष्ठी, नक्षत्र श्रवण, योग ब्रह्म और करण गर है। राहु काल शाम 5:08 – शाम 6:46 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल हैदराबाद के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 31 मई 2032 | सप्तमी | धनिष्ठा | सुबह 7:19 – सुबह 8:57 |
| मंगल, 1 जून 2032 | अष्टमी | शतभिषा | दोपहर 3:30 – शाम 5:08 |
| बुध, 2 जून 2032 | नवमी | पूर्वा भाद्रपद | दोपहर 12:14 – दोपहर 1:52 |
| गुरु, 3 जून 2032 | दशमी | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 1:52 – दोपहर 3:31 |
| शुक्र, 4 जून 2032 | एकादशी | अश्विनी | सुबह 10:36 – दोपहर 12:14 |
| शनि, 5 जून 2032 | द्वादशी | भरणी | सुबह 8:57 – सुबह 10:36 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि षष्ठी है; शाम 5:52 तक।
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र श्रवण है; सुबह 11:10 तक।
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में राहु काल कब है?
हैदराबाद में राहु काल शाम 5:08 – शाम 6:46 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 30 मई 2032 को हैदराबाद में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:41 और सूर्यास्त शाम 6:46 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।