दैनिक पंचांग
दिल्ली पंचांग, शुक्र, 17 मई 2030
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र विशाखा, योग व्यतीपात और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 10:35 – दोपहर 12:17 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:29
- सूर्यास्त
- रात 7:06
- तिथि
- पूर्णिमा · शाम 4:49 तक
- नक्षत्र
- विशाखा · शाम 6:23 तक
- योग
- व्यतीपात
- करण
- विष्टि
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 10:35 – दोपहर 12:17
- यमगंड
- दोपहर 3:41 – शाम 5:23
- गुलिक काल
- सुबह 7:11 – सुबह 8:53
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:43 – दोपहर 12:31
- अमृत काल
- दोपहर 1:08 – दोपहर 2:50
आज दिल्ली में
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में सूर्योदय तड़के 5:29 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र विशाखा, योग व्यतीपात और करण विष्टि है। राहु काल सुबह 10:35 – दोपहर 12:17 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल दिल्ली के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 18 मई 2030 | प्रतिपदा | अनुराधा | सुबह 8:53 – सुबह 10:35 |
| रवि, 19 मई 2030 | द्वितीया | ज्येष्ठा | शाम 5:24 – रात 7:07 |
| सोम, 20 मई 2030 | तृतीया | मूल | सुबह 7:10 – सुबह 8:52 |
| मंगल, 21 मई 2030 | पंचमी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 3:43 – शाम 5:25 |
| बुध, 22 मई 2030 | षष्ठी | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 12:17 – दोपहर 2:00 |
| गुरु, 23 मई 2030 | सप्तमी | श्रवण | दोपहर 2:00 – दोपहर 3:43 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; शाम 4:49 तक।
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र विशाखा है; शाम 6:23 तक।
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में राहु काल कब है?
दिल्ली में राहु काल सुबह 10:35 – दोपहर 12:17 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 17 मई 2030 को दिल्ली में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:29 और सूर्यास्त रात 7:06 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।