दैनिक पंचांग
भोपाल पंचांग, सोम, 30 अप्रैल 2029
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में सूर्योदय तड़के 5:47 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र अनुराधा, योग व्यतीपात और करण गर है। राहु काल सुबह 7:25 – सुबह 9:02 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:47
- सूर्यास्त
- शाम 6:47
- तिथि
- द्वितीया · सुबह 9:12 तक
- नक्षत्र
- अनुराधा · रात 8:26 तक
- योग
- व्यतीपात
- करण
- गर
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:25 – सुबह 9:02
- यमगंड
- सुबह 10:40 – दोपहर 12:17
- गुलिक काल
- दोपहर 1:55 – दोपहर 3:32
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:45 – दोपहर 12:33
- अमृत काल
- सुबह 6:36 – सुबह 8:13
आज भोपाल में
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में सूर्योदय तड़के 5:47 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र अनुराधा, योग व्यतीपात और करण गर है। राहु काल सुबह 7:25 – सुबह 9:02 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल भोपाल के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 1 मई 2029 | तृतीया | ज्येष्ठा | दोपहर 3:32 – शाम 5:10 |
| बुध, 2 मई 2029 | पंचमी | मूल | दोपहर 12:17 – दोपहर 1:55 |
| गुरु, 3 मई 2029 | षष्ठी | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 1:55 – दोपहर 3:33 |
| शुक्र, 4 मई 2029 | सप्तमी | उत्तराषाढ़ा | सुबह 10:39 – दोपहर 12:17 |
| शनि, 5 मई 2029 | अष्टमी | श्रवण | सुबह 9:00 – सुबह 10:38 |
| रवि, 6 मई 2029 | नवमी | धनिष्ठा | शाम 5:12 – शाम 6:50 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; सुबह 9:12 तक।
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अनुराधा है; रात 8:26 तक।
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में राहु काल कब है?
भोपाल में राहु काल सुबह 7:25 – सुबह 9:02 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 30 अप्रैल 2029 को भोपाल में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:47 और सूर्यास्त शाम 6:47 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।