Skip to content

राशि मिलान

वृषभ और वृश्चिक राशि मिलान

राशि गिनती
7
राशि स्वामी
शुक्र · मंगल
तत्व
पृथ्वी · जल

पूरा गुण मिलान कराएँ

समग्र चित्र

इन राशियों के नक्षत्र

वृषभ में कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिरा हैं; वृश्चिक में विशाखा, अनुराधा, ज्येष्ठा हैं। नीचे की तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक मिलने वाली नक्षत्र जोड़ियाँ दिखाती है।

वृषभ और वृश्चिक के तत्व

पृथ्वी और जल मिलकर उपजाऊ मिट्टी बनाते हैं, और परंपरा इसे सबसे कोमल तत्व मेलों में गिनती है। भावना और स्थिरता एक दूसरे को सहारा देते हैं, और पारिवारिक जीवन प्रायः फलता फूलता है।

वृषभ से वृश्चिक तक की गिनती: भकूट

दोनों राशियाँ आमने सामने हैं, सात और सात का संबंध। सातवाँ भाव स्वयं विवाह का भाव है, और परंपरा इसे स्वाभाविक आकर्षण और पूरकता की जोड़ी मानती है। भकूट इसे शुभ गिनता है।

चर, स्थिर और द्विस्वभाव का मेल

दोनों स्थिर राशियाँ हैं, इसलिए निष्ठा गहरी है और बदलाव धीरे आता है। परंपरा छोटी बातों में लचीलेपन की सलाह देती है, ताकि ज़िद कभी बंधन की परीक्षा न ले।

राशि मिलान से क्या पता चलता है

अष्टकूट के आठ अंगों में वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट चंद्र राशि से देखे जाते हैं; तारा, योनि, गण और नाड़ी जन्म नक्षत्र से। इसलिए राशि मिलान पूरे गुण मिलान की पहली परत है। पूरी तस्वीर के लिए नाड़ी, मांगलिक दोष और दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव भी देखा जाता है।

इस पन्ने को कैसे पढ़ें

पहले कूट तालिका देखें, फिर नक्षत्र जोड़ियाँ: एक ही राशि जोड़ी वाले दो लोगों का परिणाम उनके नक्षत्रों के अनुसार बहुत अलग हो सकता है। किसी नक्षत्र जोड़ी को खोलकर सभी कूट और अष्टकूट गुण देखें, या दोनों का जन्म विवरण भरकर पूरा मिलान कराएँ।

वृषभ और वृश्चिक के राशि आधारित अंग
कूटपरिणामअर्थ
भकूट (राशि कूट)मिलता हैवृषभ से वृश्चिक तक 7 की गिनती स्वीकार्य भकूट है।
वश्य (आकर्षण)समकोई राशि दूसरी की वश्य नहीं; आकर्षण अन्य अंगों से देखा जाता है।
ग्रह मैत्रीध्यान देंशुक्र और मंगल नैसर्गिक शत्रु हैं, इसलिए धैर्य और साफ़ बातचीत अधिक ज़रूरी है।
तत्वसमपृथ्वी का मेल जल से; गति का अंतर पूरक भी हो सकता है और टकराव भी।
वृषभ और वृश्चिक के बीच सबसे अच्छी नक्षत्र जोड़ियाँ
नक्षत्र जोड़ीनक्षत्र कूटअष्टकूट गुण (नक्षत्र आधारित)
रोहिणी + विशाखा5/79/21
मृगशिरा + अनुराधा5/79/21
कृत्तिका + अनुराधा4/79/21
रोहिणी + ज्येष्ठा4/79/21
कृत्तिका + ज्येष्ठा4/76/21
कृत्तिका + विशाखा3/76/21

सामान्य प्रश्न

क्या वृषभ और वृश्चिक की जोड़ी अच्छी है?

वधू की राशि से गिनने पर वृषभ से वृश्चिक तक 7 आता है। तालिका बताती है कि भकूट, वश्य और राशि स्वामी मिलते हैं या नहीं; अंतिम गुण अधिकतर नक्षत्रों से तय होते हैं।

वृषभ और वृश्चिक के स्वामी कौन हैं?

वृषभ के स्वामी शुक्र और वृश्चिक के स्वामी मंगल हैं। मित्र या एक ही स्वामी आपसी समझ बढ़ाते हैं; शत्रु स्वामी अधिक धैर्य माँगते हैं।

भकूट दोष क्या है?

वधू की राशि से वर की राशि तक गिनती 6 और 8 (षडाष्टक), 2 और 12 (द्विद्वादश) या 5 और 9 (नवपंचम) आए तो उत्तर भारत में भकूट दोष माना जाता है। राशि स्वामी एक हों या मित्र हों तो शास्त्र इसका परिहार बताता है।

क्या वृषभ के साथ वृश्चिक और वृश्चिक के साथ वृषभ अलग हैं?

हाँ। पारंपरिक मिलान वधू की राशि से वर की राशि तक गिनता है, इसलिए उलटी जोड़ी का फल अलग हो सकता है। पन्ने के नीचे उलटी जोड़ी का लिंक है।

भकूट न मिले तो क्या करें?

नाड़ी, गण और तारा जैसे नक्षत्र आधारित अंग मज़बूत हों और राशि स्वामी मित्र हों, तो बहुत से पंडित जी रिश्ता स्वीकार कर लेते हैं। एक अंग अकेले निर्णय नहीं करता।

वृषभ और वृश्चिक के तत्व कौन से हैं?

वृषभ पृथ्वी तत्व की और वृश्चिक जल तत्व की राशि है। समान तत्व स्वभाव बाँटते हैं; पूरक तत्व एक दूसरे को संतुलित कर सकते हैं।

क्या इतने से विवाह तय हो सकता है?

नहीं, यह परिचय है। पूरा मिलान दोनों की सटीक कुंडली, सभी अष्टकूट अंग, मांगलिक दोष और दशाओं का समय देखता है।

पूरा कुंडली मिलान कैसे कराएँ?

दोनों का जन्म विवरण गुण मिलान साधन में भरें। परिणाम में हर कूट अपने अर्थ के साथ दिखेगा।

क्या वृषभ और वृश्चिक के तत्व एक दूसरे के अनुकूल हैं?

वृषभ पृथ्वी और वृश्चिक जल तत्व की है। ऊपर का तत्व वाला भाग बताता है कि परंपरा इस मेल को कैसे देखती है और क्या इसे मज़बूत करता है।

वृषभ और वृश्चिक में भकूट गिनती क्या है?

वृषभ से वृश्चिक तक गिनने पर 7 आता है। भकूट दोनों ओर से राशि की दूरी देखता है; ऊपर का भाग इस गिनती का पारंपरिक अर्थ बताता है।

वृषभ और वृश्चिक में कौन सी नक्षत्र जोड़ियाँ सबसे अच्छी हैं?

इस पन्ने की नक्षत्र तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक कूट मिलने वाली जोड़ियाँ दिखाती है। हर जोड़ी का अपना विस्तृत पन्ना है।

वृषभ और वृश्चिक का दांपत्य मज़बूत कैसे करें?

परंपरा कहती है कि त्योहार और पारिवारिक संस्कार साथ मनाएँ, और दोनों राशियों के स्वामी शुक्र और मंगल का उनके वार को स्मरण करें। प्रेम भरी बातचीत किसी भी कूट से अधिक काम करती है।