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राशि मिलान

मेष और मीन राशि मिलान

राशि गिनती
12
राशि स्वामी
मंगल · गुरु
तत्व
अग्नि · जल

पूरा गुण मिलान कराएँ

समग्र चित्र

इन राशियों के नक्षत्र

मेष में अश्विनी, भरणी, कृत्तिका हैं; मीन में पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद, रेवती हैं। नीचे की तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक मिलने वाली नक्षत्र जोड़ियाँ दिखाती है।

मेष और मीन के तत्व

अग्नि और जल पारंपरिक विपरीत हैं, फिर भी साथ मिलकर भाप बनाते हैं जो चीज़ों को चलाती है। एक साहस से कर्म करता है, दूसरा गहराई से महसूस करता है। परंपरा धैर्य और मीठी वाणी की सलाह देती है।

मेष से मीन तक की गिनती: भकूट

दोनों राशियाँ दो और बारह के संबंध में हैं, जिसे द्विद्वादश कहते हैं। गुण मिलान का भकूट इसे सावधानी से देखता है और इसे खर्च और अलग प्राथमिकताओं से जोड़ता है। राशि स्वामी मित्र हों तो बहुत से पंडित जी इसका परिहार मानते हैं।

चर, स्थिर और द्विस्वभाव का मेल

चर राशि का मेल द्विस्वभाव राशि से: पहल का मेल लचीलेपन से। यह जोड़ी बदलाव अच्छे से सँभालती है, और साझा लक्ष्य इसे बिखरने नहीं देते।

राशि मिलान से क्या पता चलता है

अष्टकूट के आठ अंगों में वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट चंद्र राशि से देखे जाते हैं; तारा, योनि, गण और नाड़ी जन्म नक्षत्र से। इसलिए राशि मिलान पूरे गुण मिलान की पहली परत है। पूरी तस्वीर के लिए नाड़ी, मांगलिक दोष और दोनों कुंडलियों का सातवाँ भाव भी देखा जाता है।

इस पन्ने को कैसे पढ़ें

पहले कूट तालिका देखें, फिर नक्षत्र जोड़ियाँ: एक ही राशि जोड़ी वाले दो लोगों का परिणाम उनके नक्षत्रों के अनुसार बहुत अलग हो सकता है। किसी नक्षत्र जोड़ी को खोलकर सभी कूट और अष्टकूट गुण देखें, या दोनों का जन्म विवरण भरकर पूरा मिलान कराएँ।

मेष और मीन के राशि आधारित अंग
कूटपरिणामअर्थ
भकूट (राशि कूट)ध्यान देंमेष से मीन तक 12 की गिनती उन गिनतियों में है जिन्हें परंपरा सावधानी से देखती है।
वश्य (आकर्षण)समकोई राशि दूसरी की वश्य नहीं; आकर्षण अन्य अंगों से देखा जाता है।
ग्रह मैत्रीमिलता हैमंगल और गुरु शत्रु नहीं हैं, जो सहयोग को बल देता है।
तत्वसमअग्नि का मेल जल से; गति का अंतर पूरक भी हो सकता है और टकराव भी।
मेष और मीन के बीच सबसे अच्छी नक्षत्र जोड़ियाँ
नक्षत्र जोड़ीनक्षत्र कूटअष्टकूट गुण (नक्षत्र आधारित)
अश्विनी + उत्तर भाद्रपद4/79/21
अश्विनी + रेवती4/79/21
भरणी + पूर्व भाद्रपद4/79/21
भरणी + रेवती4/79/21
कृत्तिका + उत्तर भाद्रपद4/79/21
अश्विनी + पूर्व भाद्रपद4/76/21

सामान्य प्रश्न

क्या मेष और मीन की जोड़ी अच्छी है?

वधू की राशि से गिनने पर मेष से मीन तक 12 आता है। तालिका बताती है कि भकूट, वश्य और राशि स्वामी मिलते हैं या नहीं; अंतिम गुण अधिकतर नक्षत्रों से तय होते हैं।

मेष और मीन के स्वामी कौन हैं?

मेष के स्वामी मंगल और मीन के स्वामी गुरु हैं। मित्र या एक ही स्वामी आपसी समझ बढ़ाते हैं; शत्रु स्वामी अधिक धैर्य माँगते हैं।

भकूट दोष क्या है?

वधू की राशि से वर की राशि तक गिनती 6 और 8 (षडाष्टक), 2 और 12 (द्विद्वादश) या 5 और 9 (नवपंचम) आए तो उत्तर भारत में भकूट दोष माना जाता है। राशि स्वामी एक हों या मित्र हों तो शास्त्र इसका परिहार बताता है।

क्या मेष के साथ मीन और मीन के साथ मेष अलग हैं?

हाँ। पारंपरिक मिलान वधू की राशि से वर की राशि तक गिनता है, इसलिए उलटी जोड़ी का फल अलग हो सकता है। पन्ने के नीचे उलटी जोड़ी का लिंक है।

भकूट न मिले तो क्या करें?

नाड़ी, गण और तारा जैसे नक्षत्र आधारित अंग मज़बूत हों और राशि स्वामी मित्र हों, तो बहुत से पंडित जी रिश्ता स्वीकार कर लेते हैं। एक अंग अकेले निर्णय नहीं करता।

मेष और मीन के तत्व कौन से हैं?

मेष अग्नि तत्व की और मीन जल तत्व की राशि है। समान तत्व स्वभाव बाँटते हैं; पूरक तत्व एक दूसरे को संतुलित कर सकते हैं।

क्या इतने से विवाह तय हो सकता है?

नहीं, यह परिचय है। पूरा मिलान दोनों की सटीक कुंडली, सभी अष्टकूट अंग, मांगलिक दोष और दशाओं का समय देखता है।

पूरा कुंडली मिलान कैसे कराएँ?

दोनों का जन्म विवरण गुण मिलान साधन में भरें। परिणाम में हर कूट अपने अर्थ के साथ दिखेगा।

क्या मेष और मीन के तत्व एक दूसरे के अनुकूल हैं?

मेष अग्नि और मीन जल तत्व की है। ऊपर का तत्व वाला भाग बताता है कि परंपरा इस मेल को कैसे देखती है और क्या इसे मज़बूत करता है।

मेष और मीन में भकूट गिनती क्या है?

मेष से मीन तक गिनने पर 12 आता है। भकूट दोनों ओर से राशि की दूरी देखता है; ऊपर का भाग इस गिनती का पारंपरिक अर्थ बताता है।

मेष और मीन में कौन सी नक्षत्र जोड़ियाँ सबसे अच्छी हैं?

इस पन्ने की नक्षत्र तालिका दोनों राशियों के बीच सबसे अधिक कूट मिलने वाली जोड़ियाँ दिखाती है। हर जोड़ी का अपना विस्तृत पन्ना है।

मेष और मीन का दांपत्य मज़बूत कैसे करें?

परंपरा कहती है कि त्योहार और पारिवारिक संस्कार साथ मनाएँ, और दोनों राशियों के स्वामी मंगल और गुरु का उनके वार को स्मरण करें। प्रेम भरी बातचीत किसी भी कूट से अधिक काम करती है।