सामग्री पर जाएँ

पत्रिका

ज्योतिष, पंचांग और वास्तु की कथाएँ, हर प्रांत की अपनी बोली में

यह पत्रिका वह जगह है जहाँ दीवार पर टँगा पंचांग कहानियों में बदल जाता है। तमिल परिवार गुरु पेयर्ची की राह देखता है, बंगाली घर संधि पूजा के क्षण गिनता है, मराठी आँगन कोजागिरी पूर्णिमा की रात चाँदनी में केसर वाला दूध लेकर जागता है, और उत्तर भारत में मकर संक्रांति पर तिल गुड़ बँटता है। हर लेख अपनी भाषा और अपनी परंपरा में लिखा गया है, ताकि आप त्योहार, नक्षत्र या घर की रीत को वैसे ही पढ़ें जैसे दादी नानी सुनाती थीं, किसी और भाषा के अनुवाद की तरह नहीं।

यहाँ क्या मिलेगा

सोलह खानों में कथाएँ सजी हैं: पंचांग और दिन के अंग, सत्ताईस नक्षत्र, बारह राशियाँ, नवग्रह, त्योहार, मुहूर्त, वास्तु, दिनचर्या, उपाय, रत्न, अंक ज्योतिष, दशा, दोष, यंत्र, कुंडली मिलान और पाश्चात्य ज्योतिष। कुछ लेख एक बात सरलता से समझाते हैं, जैसे हिंदू दिन सूर्योदय से क्यों शुरू होता है या अभिजित मुहूर्त क्या है। कुछ लेख पूरे मौसम भर एक रीत के साथ चलते हैं, कार्तिक के दीपों से लेकर नवरात्रि के गरबे तक। हर लेख के अंत में एक छोटा उत्तर है जिसे आप याद रख सकें, और उन साधनों की कड़ियाँ हैं जिनसे वही बात आपकी अपनी कुंडली या अपने शहर के लिए दिखे।

चौदह भाषाओं में, हर एक अपनी आवाज़ में

ऊपर की भाषा पट्टी से पत्रिका को हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, संस्कृत, बांग्ला, गुजराती, स्पेनिश, मराठी, पंजाबी, ओड़िया या उर्दू में पढ़िए। लेख एक भाषा से दूसरी में नक़ल नहीं किए जाते। साठ संवत्सरों पर तेलुगु लेख, रुद्राक्ष की देखभाल पर पंजाबी टिप्पणी और भोर के सुभाषितों पर संस्कृत चिंतन, हर एक अपने घर में जन्मा है। जो लेख अभी आपकी भाषा में नहीं लिखा गया, उसका शीर्षक और ध्यान से लिखा सार आपको हिंदी में मिलता है, साथ में उन भाषाओं की कड़ियाँ जिनमें पूरा लेख है।

बाक़ी साइट के साथ कैसे पढ़ें

कथाएँ किसी काम की जगह तक ले जाने के लिए हैं। राहु काल का लेख आपके शहर के आज के पंचांग तक ले जाता है, मंगल दोष का लेख कुंडली मिलान तक, वास्तु की कथा दिशा प्लानर तक। शीर्षक के नीचे के खानों से विषय चुनिए, नीचे की कड़ियों से पुराने लेख देखिए, और किसी भी भाषा में फ़ीड से पत्रिका से जुड़े रहिए। त्योहार या नक्षत्र जैसा मनपसंद खाना याद रखिए और हर नए मौसम से पहले लौट आइए।

पत्रिका पढ़िए

  1. अपनी भाषा चुनिए. पत्रिका के ऊपर की पट्टी से भाषा चुनिए।
  2. विषय चुनिए. त्योहार या नक्षत्र जैसा खाना चुनिए, या सभी पर रहिए।
  3. कथा खोलिए. लेख, उसका छोटा उत्तर और अंत की कड़ियाँ पढ़िए।
  4. अपनी कुंडली पर आज़माइए. कड़ी से उस साधन तक जाइए और बात अपनी जन्म जानकारी या शहर के लिए देखिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नए लेख कितनी बार आते हैं?

साल भर नए लेख आते रहते हैं, बड़े त्योहारों और ऋतु बदलने के आसपास ज़्यादा, ताकि पत्रिका पंचांग के साथ चले।

क्या पत्रिका मेरी भाषा में पढ़ सकते हैं?

हाँ। ऊपर की पट्टी से अपनी भाषा चुनिए, सूची, शीर्षक और सार उसी में बदल जाते हैं।

मेरी भाषा में केवल सार क्यों दिखता है?

हर लेख अपनी भाषा में नए सिरे से लिखा जाता है। जब तक आपकी भाषा में न लिखा जाए, सार और पूरे लेख की कड़ियाँ दिखती हैं।

क्या ये कथाएँ परंपरा पर आधारित हैं?

हाँ। ये पंचांग, शास्त्रीय ग्रंथों और हर प्रांत के घरों की रीतों से ली गई हैं।

एक विषय के लेख कैसे खोजें?

शीर्षक के नीचे त्योहार, नक्षत्र या वास्तु जैसा खाना चुनिए।

क्या फ़ीड रीडर में पत्रिका पढ़ सकते हैं?

हाँ। हर भाषा की अपनी फ़ीड है, जिसकी कड़ी पत्रिका पेज पर है।

क्या लेख साझा कर सकते हैं?

हाँ। हर लेख का अपना पता है जिसे आप परिवार और मित्रों को भेज सकते हैं।

क्या पत्रिका पढ़ना मुफ़्त है?

हाँ। हर कथा मुफ़्त है, लॉगिन की ज़रूरत नहीं।

पढ़ने के बाद कहाँ जाएँ?

हर लेख अपने विषय के साधन तक ले जाता है, जैसे आज का पंचांग, कुंडली मिलान या वास्तु प्लानर।