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Transit

Peyarchi

When each planet changes sign (Peyarchi) or turns retrograde, with dates for the year ahead. Open Transit to see how each change affects your chart.

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ग्रहों का राशि परिवर्तन

राशि परिवर्तन: जब ग्रह राशि बदलते हैं

किसी ग्रह का एक राशि से अगली राशि में जाना राशि परिवर्तन कहलाता है। बड़े परिवर्तन, यानी गुरु का राशि परिवर्तन, शनि का राशि परिवर्तन और राहु केतु का राशि परिवर्तन, हर राशि के लिए पूरे साल का रंग तय करते हैं। इस पन्ने पर हर ग्रह के आने वाले राशि परिवर्तन, उनकी तारीख़ें, चाल की दिशा और आपकी चंद्र राशि के लिए उनका अर्थ दिया गया है।

धीमे ग्रह सबसे अहम

चंद्रमा ढाई दिन में और सूर्य हर महीने राशि बदलते हैं, पर गुरु एक राशि में लगभग एक साल, शनि लगभग ढाई साल और राहु केतु लगभग अठारह महीने रहते हैं। इनके गोचर लंबे समय की पृष्ठभूमि बनाते हैं, इसीलिए मंदिर और पंचांग गुरु और शनि के राशि परिवर्तन की घोषणा पहले से करते हैं। नव संवत्सर पर पढ़े जाने वाले संवत्सर फल में भी हर राशि के लिए गुरु और शनि की स्थिति सबसे पहले बताई जाती है।

अपनी राशि के लिए फल कैसे पढ़ें

गोचर का फल चंद्र राशि से गिनकर देखा जाता है कि ग्रह किस भाव में आया। परंपरा से गुरु दूसरे, पाँचवें, सातवें, नौवें और ग्यारहवें भाव में शुभ; शनि तीसरे, छठे और ग्यारहवें में; राहु केतु तीसरे, छठे और ग्यारहवें में शुभ माने जाते हैं। दूसरे ग्रहों का वेध फल बदल सकता है, और आपकी चल रही दशा तय करती है कि आप उसे कितना महसूस करेंगे।

वक्री चाल

बाहरी ग्रह समय समय पर पीछे चलते दिखते हैं; इसे वक्री होना कहते हैं। वक्री ग्रह पिछली राशि में लौटकर फिर आगे बढ़ सकता है, इसलिए एक ही राशि परिवर्तन की एक से अधिक तारीख़ें हो सकती हैं। सूची में राशि प्रवेश के साथ वक्री और मार्गी होने की तिथियाँ भी दिखाई गई हैं।

दृक और पारंपरिक तिथियाँ

उत्तर भारत के ज़्यादातर पंचांग, जैसे काशी और उज्जैन के पंचांग, अब दृक गणित पर चलते हैं। पर कुछ पुराने सारणी आधारित पंचांग, और दक्षिण के वाक्य पंचांग, शनि और गुरु के लिए कुछ दिन या कभी कुछ हफ़्तों का अंतर दे सकते हैं। आप जिस पद्धति को मानते हैं, उसे चुनें ताकि तारीख़ें मेल खाएँ।

राशि परिवर्तन और मंदिर पूजा

हर बड़े राशि परिवर्तन पर मंदिरों में विशेष पूजा होती है: शनि के लिए शनि शिंगणापुर और कोसीकलाँ का शनि धाम, राहु केतु और कालसर्प शांति के लिए त्र्यंबकेश्वर और उज्जैन, मंगल के लिए उज्जैन का मंगलनाथ, और गुरु के लिए गुरुवार को केले के पेड़ और विष्णु की पूजा। कठिन गोचर वाली राशियों के लोग तारीख़ से पहले दर्शन करते हैं, और शुभ गोचर पाने वाले धन्यवाद देने जाते हैं। कई परिवार शुभ गुरु के बाद विवाह, घर ख़रीदने और नए काम की योजना बनाते हैं।

आकाश की घड़ी: परंपरा की दृष्टि

ऋषियों ने गुरु और शनि को आकाश की बड़ी घड़ी की सुइयाँ माना: गुरु बारह साल में एक चक्कर, शनि तीस साल में। साठ संवत्सरों का चक्र, प्रभव से अक्षय तक, इन्हीं दोनों के मिलन से जुड़ा है। कुंभ मेला भी गुरु की राशि पर टिका है: गुरु कुंभ में हों और सूर्य मेष में, तब हरिद्वार; गुरु वृषभ में हों तब प्रयागराज। जैसे चंद्रमा समुद्र में ज्वार उठाता है, वैसे ही धीमे ग्रह जीवन की लंबी ऋतुओं को हिलाते हैं, यही परंपरा का विश्वास है।

राशि परिवर्तन देखें

  1. ग्रह चुनें. गुरु, शनि, राहु केतु या कोई और ग्रह।
  2. तारीख़ें देखें. राशि प्रवेश और वक्री मार्गी तिथियाँ पढ़ें।
  3. अपनी राशि खोजें. पढ़ें कि यह परिवर्तन आपकी राशि के लिए क्या कहता है।
  4. निजी दृष्टि. जन्म विवरण के साथ गोचर खोलें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुरु का राशि परिवर्तन क्या है?

लगभग हर साल गुरु का राशि बदलना। इसे समृद्धि, विवाह और संतान के लिए सबसे अहम गोचरों में गिना जाता है।

शनि का राशि परिवर्तन क्या है?

लगभग हर ढाई साल में शनि का राशि बदलना। इससे अलग अलग राशियों की साढ़ेसाती और ढैया शुरू या समाप्त होती है।

राहु केतु का राशि परिवर्तन क्या है?

लगभग हर अठारह महीने में छाया ग्रहों का स्थान बदलना। राहु और केतु हमेशा उल्टी दिशा में चलते हैं।

पंचांगों में तारीख़ें अलग क्यों होती हैं?

दृक और पारंपरिक गणना पद्धतियाँ अलग तारीख़ें देती हैं। जिस पद्धति को मानते हैं, वही चुनें।

अपनी राशि के लिए फल कैसे देखें?

चंद्र राशि से गिनें कि ग्रह किस भाव में आया। यह पन्ना यह गिनती करके छोटा फल देता है।

गुरु किन भावों में शुभ है?

परंपरा से चंद्रमा से दूसरा, पाँचवाँ, सातवाँ, नौवाँ और ग्यारहवाँ भाव।

शनि किन भावों में शुभ है?

परंपरा से चंद्रमा से तीसरा, छठा और ग्यारहवाँ भाव।

वक्री क्या है?

वह समय जब ग्रह तारों के सामने पीछे चलता दिखता है। तब वह कुछ समय के लिए पिछली राशि में लौट सकता है।

क्या राशि परिवर्तन सब पर एक जैसा असर करता है?

नहीं। चंद्र राशि से भाव, लग्न और दशा, सब फल बदलते हैं।

कठिन गोचर के लिए उपाय हैं?

मंदिरों में ग्रह शांति पूजा होती है, और संबंधित ग्रह की प्रार्थना आम है। दान और धैर्य हमेशा सुझाए जाते हैं।

क्या पुराने राशि परिवर्तन देख सकते हैं?

हाँ। तारीख़ की सीमा बदलें, पिछले परिवर्तन दिखेंगे।

अपनी कुंडली पर असर कहाँ देखूँ?

जन्म विवरण के साथ गोचर पन्ना खोलें और हर ग्रह को अपने भावों पर देखें।