शास्त्रीय योग
गजकेसरी योग
चंद्रमा से पहले, चौथे, सातवें या दसवें, यानी केंद्र भाव में गुरु हो तो गजकेसरी योग बनता है। हाथी और सिंह का यह नाम शक्ति और गरिमा का प्रतीक है।
गजकेसरी योग का निर्माण और फल
गज यानी हाथी और केसरी यानी सिंह: यह नाम स्थिर गरिमा को निडर बल से जोड़ता है। वराहमिहिर के अनुसार चंद्रमा से केंद्र में गुरु लेकर जन्मा व्यक्ति शत्रुओं को जीतता है, अधिकार से बोलता है और सभाओं में सम्मान पाता है। गुरु और चंद्रमा दोनों नीच, अस्त या निर्बल न हों तो इसका आशीर्वाद पूरा मिलता है।
योग के फल
यह योग यश, ज्ञान, उदारता, समाज में सम्मान और शत्रुओं पर विजय देता है। गुरु और चंद्रमा नीच न हों और उन पर पाप ग्रहों की दृष्टि न हो, तो फल पूर्ण होता है।
योग का बल कैसे परखें
कुंडली में किसी योग का होना ही पर्याप्त नहीं है। योग बनाने वाले ग्रह उच्च, स्वराशि या मित्र राशि में हैं या नहीं, अस्त तो नहीं हैं, उन पर पाप ग्रहों की दृष्टि तो नहीं है, यह सब देखकर ही ज्योतिषी उसके पूरे फल का अनुमान लगाते हैं। नवांश में भी वे ग्रह बलवान हों तो योग निश्चित रूप से फल देता है।
योगों का सामान्य सिद्धांत
पराशर के अनुसार केंद्र विष्णु स्थान हैं और त्रिकोण लक्ष्मी स्थान। इनके स्वामी और शुभ ग्रह जब आपस में जुड़ते हैं तब योग बनते हैं; दुःस्थान के स्वामियों का संबंध उनके फल को घटा देता है या उसकी दिशा बदल देता है।
योग क्या है
ज्योतिष में योग ग्रह, राशि और भाव का वह विशेष संयोग है जिसके विशिष्ट फल शास्त्रों में बताए गए हैं। कुछ योग पद या धन, कुछ स्वभाव और कुछ कठिनाइयाँ दर्शाते हैं। योग बनाने वाले ग्रह बलवान और पीड़ा रहित हों और उनकी दशा चल रही हो, तभी पूरा फल मिलता है।
क्या आपकी कुंडली में गजकेसरी योग है
योग की पहचान लग्न के अनुसार बदलने वाले भावों और स्वामियों पर निर्भर करती है। कौन से योग हैं, ग्रह कितने बलवान हैं और उनकी दशा कब है, यह देखने के लिए अपनी कुंडली बनाएँ।
सामान्य प्रश्न
गजकेसरी योग कैसे बनता है?
इस पृष्ठ के ऊपर की व्याख्या शास्त्रीय नियम देती है। यह आपके लग्न से बने भाव स्वामियों पर निर्भर करता है।
गजकेसरी योग कब फल देता है?
अधिकतर योग बनाने वाले ग्रहों की दशा या अंतर्दशा में, जब वे राशि और भाव से बलवान हों।
क्या गजकेसरी योग दुर्लभ है?
किसी न किसी रूप में यह कई कुंडलियों में मिलता है। बल ही मुख्य है: बलवान ग्रह स्पष्ट फल और कमज़ोर ग्रह मध्यम फल देते हैं।
क्या गजकेसरी योग भंग हो सकता है?
शास्त्र कहते हैं कि ग्रहों का नीच होना, अस्त होना या पाप पीड़ा योग को कमज़ोर करती है। पूरी कुंडली की जाँच इन्हें देखती है।
कैसे जानें कि मेरी कुंडली में गजकेसरी योग है?
मुफ़्त कुंडली बनाएँ; योग भाग हर पहचाने गए संयोग को ग्रहों सहित दिखाएगा।
इस योग के लिए कौन सी उपासना अनुकूल है?
गुरुवार को भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा तथा बड़ों की सेवा इस योग को बल देती है।
यह योग कब फल देता है?
योग बनाने वाले ग्रहों की दशा या अंतर्दशा चलने पर, और जब गुरु व शनि गोचर में उन्हें स्पर्श करते हैं, तब इसका फल स्पष्ट दिखता है। युवावस्था में उनकी दशा न आए तो फल बाद के जीवन में मिलता है।
अगर मेरी कुंडली में यह योग नहीं है तो क्या चिंता करनी चाहिए?
बिल्कुल नहीं। हर कुंडली में कई योग और कई कमज़ोरियाँ साथ साथ होती हैं। किसी एक योग का न होना कमी नहीं है; लग्न, दशा, अच्छे कर्म और ईश्वर भक्ति ही जीवन को आकार देते हैं, ऐसा बड़े बुज़ुर्गों का मत है।