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घर का वास्तु

शौचालय और स्नानघर का वास्तु: दिशा और व्यवस्था

वास्तु शास्त्र हर कमरे को उस क्षेत्र में रखता है जिसका तत्व और स्वामी देवता उसके उपयोग के अनुकूल हो। शौचालय और स्नानघर के लिए सुझाया गया स्थान है: उत्तर पश्चिम या पश्चिम; कुछ मतों में दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का दक्षिणी भाग। इनसे बचना चाहिए: उत्तर पूर्व, केंद्र (ब्रह्मस्थान), दक्षिण पश्चिम कोना। ये दिशानिर्देश घर की दिशा और भूखंड के आकार के अनुसार बदलते हैं।

बचें
उत्तर पूर्व, केंद्र (ब्रह्मस्थान), दक्षिण पश्चिम कोना
देवता
वायु
उत्तम क्षेत्र
उत्तर पश्चिम या पश्चिम; कुछ मतों में दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का दक्षिणी भाग
ग्रह
चंद्रमा
तत्व
जल और वायु

अपना नक्शा जाँचें

शौचालय और स्नानघर के लिए सबसे अच्छी दिशा

शौचालय अपशिष्ट बाहर ले जाते हैं, इसलिए उन्हें वहाँ रखा जाता है जहाँ वे पवित्र या स्थिरता देने वाले क्षेत्रों को न छेड़ें: प्रायः उत्तर पश्चिम या पश्चिम, और कुछ मतों में दक्षिण का दक्षिण पूर्वी भाग। ये कभी उत्तर पूर्व में या घर के केंद्र में नहीं होने चाहिए।

शौचालय और स्नानघर की व्यवस्था

कमोड उत्तर दक्षिण दिशा में होना उत्तम है। दरवाज़ा बंद रखिए, पूर्व या उत्तरी दीवार में एग्ज़ॉस्ट के साथ अच्छी हवा सुनिश्चित कीजिए और हल्के रंग प्रयोग कीजिए। नहाने की जगह स्नानघर के पूर्व या उत्तर की ओर हो सकती है।

शौचालय और स्नानघर: आम गलतियाँ

उत्तर पूर्व या घर के केंद्र में शौचालय, रसोई या पूजा कक्ष की ओर खुलता शौचालय का दरवाज़ा, कम हवा, और दरवाज़ा खुला छोड़ना आम गलतियाँ हैं।

जब आदर्श स्थान संभव न हो

फ़्लैट और पहले से बने घर शायद ही हर नियम से मेल खाते हैं। मुख्य क्षेत्रों को प्राथमिकता दीजिए: उत्तर पूर्व हल्का और खुला, दक्षिण पश्चिम भारी और स्थिर, अग्नि दक्षिण पूर्व में, और बाकी को फ़र्नीचर की जगह, रंगों और रोशनी से संतुलित कीजिए। इस साइट का वास्तु उपकरण आपके नक्शे को क्षेत्र दर क्षेत्र जाँचने में मदद करता है।

सही उत्तर से शुरुआत करें

हर वास्तु आकलन भूखंड की सही दिशा पर निर्भर है। घर के बीच से, धातु और बिजली के उपकरणों से दूर, कंपास से दिशा लीजिए, और नक्शा बना रहे हों तो चुंबकीय झुकाव का सुधार कीजिए। घर का मुख वह दिशा है जिधर आप मुख्य द्वार से बाहर निकलते समय देखते हैं।

सामान्य प्रश्न

क्या वास्तु में शौचालय और स्नानघर का वास्तु: दिशा और व्यवस्था महत्वपूर्ण है?

व्यवस्था इस पृष्ठ में बताए गए पंचतत्व और दिशाओं के अनुसार होती है। इसे प्रकाश, हवा और परिवार द्वारा जगह के वास्तविक उपयोग के साथ मार्गदर्शन के रूप में लीजिए।

अगर मेरा घर इन नियमों के अनुसार नहीं है तो?

अधिकतर कमियाँ रंग, रोशनी, फ़र्नीचर की जगह या कमरे का उपयोग बदलने जैसे सरल सुधारों से संभल जाती हैं, बिना ढाँचे में बदलाव के।

क्या मैं अपना नक्शा ऑनलाइन जाँच सकता हूँ?

हाँ। वास्तु योजनाकार में अपना नक्शा अपलोड करें या बनाएँ, और क्षेत्र, अंक तथा सुझाए गए सुधार देखें।

क्या वास्तु फ़्लैट पर भी लागू होता है?

हाँ। फ़्लैट का अपना प्रवेश द्वार और कमरों की व्यवस्था स्वतंत्र घर की तरह ही पढ़ी जाती है।

शौचालय और स्नानघर के लिए कौन सी दिशा सबसे अच्छी है?

उत्तर पश्चिम या पश्चिम; कुछ मतों में दक्षिण पश्चिम क्षेत्र का दक्षिणी भाग।

शौचालय और स्नानघर कहाँ कभी नहीं होना चाहिए?

उत्तर पूर्व, केंद्र (ब्रह्मस्थान), दक्षिण पश्चिम कोना।

क्या वास्तु उपाय गलत जगह बने कमरे को ठीक कर सकते हैं?

छोटे असंतुलन प्रायः रंग, दर्पण, पौधे, धातु की पट्टियों और कमरे का उपयोग बदलने से कम हो जाते हैं। ढाँचागत समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की जाँच चाहिए हो सकती है।

क्या ये नियम फ़्लैट पर भी लागू होते हैं?

हाँ, फ़्लैट के अंदर। दिशाएँ पूरी इमारत से नहीं, आपके अपने फ़्लैट के केंद्र से ली जाती हैं।