घर का वास्तु
पूजा कक्ष का वास्तु: दिशा और व्यवस्था
वास्तु शास्त्र हर कमरे को उस क्षेत्र में रखता है जिसका तत्व और स्वामी देवता उसके उपयोग के अनुकूल हो। पूजा कक्ष के लिए सुझाया गया स्थान है: उत्तर पूर्व (ईशान)। इनसे बचना चाहिए: दक्षिण, दक्षिण पश्चिम, सीढ़ी के नीचे, शौचालय के पास। ये दिशानिर्देश घर की दिशा और भूखंड के आकार के अनुसार बदलते हैं।
- बचें
- दक्षिण, दक्षिण पश्चिम, सीढ़ी के नीचे, शौचालय के पास
- देवता
- ईशान
- उत्तम क्षेत्र
- उत्तर पूर्व (ईशान)
- ग्रह
- गुरु
- तत्व
- जल और आकाश
पूजा कक्ष के लिए सबसे अच्छी दिशा
पूजा कक्ष के लिए आदर्श स्थान उत्तर पूर्व है, ईशान द्वारा शासित सबसे पवित्र दिशा। यह संभव न हो तो पूर्व या उत्तर स्वीकार्य हैं। स्थान शांत, स्वच्छ और थोड़ा ऊँचा होना चाहिए, और शौचालय से साझा दीवार कभी नहीं होनी चाहिए।
पूजा कक्ष की व्यवस्था
मूर्तियों का मुख पूर्व या पश्चिम की ओर, और पूजा करने वाले का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो। सफ़ेद, हल्का पीला या हल्का नीला रंग प्रयोग कीजिए, दीपक कमरे के दक्षिण पूर्व में रखिए और असंबंधित चीज़ें न रखिए। भीड़ वाली जगह में खुली ताक के बजाय देहरी वाला छोटा कमरा बेहतर है।
पूजा कक्ष: आम गलतियाँ
टूटी मूर्तियाँ या फीकी तस्वीरें रखना, बिना पर्दे या दरवाज़े के शयनकक्ष में मंदिर, एक दूसरे की ओर मुख वाली मूर्तियाँ, और शौचालय के ऊपर या सीढ़ी के नीचे पूजा की ताक आम गलतियाँ हैं।
जब आदर्श स्थान संभव न हो
फ़्लैट और पहले से बने घर शायद ही हर नियम से मेल खाते हैं। मुख्य क्षेत्रों को प्राथमिकता दीजिए: उत्तर पूर्व हल्का और खुला, दक्षिण पश्चिम भारी और स्थिर, अग्नि दक्षिण पूर्व में, और बाकी को फ़र्नीचर की जगह, रंगों और रोशनी से संतुलित कीजिए। इस साइट का वास्तु उपकरण आपके नक्शे को क्षेत्र दर क्षेत्र जाँचने में मदद करता है।
सही उत्तर से शुरुआत करें
हर वास्तु आकलन भूखंड की सही दिशा पर निर्भर है। घर के बीच से, धातु और बिजली के उपकरणों से दूर, कंपास से दिशा लीजिए, और नक्शा बना रहे हों तो चुंबकीय झुकाव का सुधार कीजिए। घर का मुख वह दिशा है जिधर आप मुख्य द्वार से बाहर निकलते समय देखते हैं।
सामान्य प्रश्न
क्या वास्तु में पूजा कक्ष का वास्तु: दिशा और व्यवस्था महत्वपूर्ण है?
व्यवस्था इस पृष्ठ में बताए गए पंचतत्व और दिशाओं के अनुसार होती है। इसे प्रकाश, हवा और परिवार द्वारा जगह के वास्तविक उपयोग के साथ मार्गदर्शन के रूप में लीजिए।
अगर मेरा घर इन नियमों के अनुसार नहीं है तो?
अधिकतर कमियाँ रंग, रोशनी, फ़र्नीचर की जगह या कमरे का उपयोग बदलने जैसे सरल सुधारों से संभल जाती हैं, बिना ढाँचे में बदलाव के।
क्या मैं अपना नक्शा ऑनलाइन जाँच सकता हूँ?
हाँ। वास्तु योजनाकार में अपना नक्शा अपलोड करें या बनाएँ, और क्षेत्र, अंक तथा सुझाए गए सुधार देखें।
क्या वास्तु फ़्लैट पर भी लागू होता है?
हाँ। फ़्लैट का अपना प्रवेश द्वार और कमरों की व्यवस्था स्वतंत्र घर की तरह ही पढ़ी जाती है।
पूजा कक्ष के लिए कौन सी दिशा सबसे अच्छी है?
उत्तर पूर्व (ईशान)।
पूजा कक्ष कहाँ कभी नहीं होना चाहिए?
दक्षिण, दक्षिण पश्चिम, सीढ़ी के नीचे, शौचालय के पास।
क्या वास्तु उपाय गलत जगह बने कमरे को ठीक कर सकते हैं?
छोटे असंतुलन प्रायः रंग, दर्पण, पौधे, धातु की पट्टियों और कमरे का उपयोग बदलने से कम हो जाते हैं। ढाँचागत समस्याओं के लिए विशेषज्ञ की जाँच चाहिए हो सकती है।
क्या ये नियम फ़्लैट पर भी लागू होते हैं?
हाँ, फ़्लैट के अंदर। दिशाएँ पूरी इमारत से नहीं, आपके अपने फ़्लैट के केंद्र से ली जाती हैं।