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शुभ समय

समय सारांश

आने वाले दिनों के शुभ समय, आपकी चुनी गई गतिविधि के अनुसार क्रम में।

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समय

आपका समय एक नज़र में: दशा, गोचर और आज

समय दृश्य उन तीन परतों को एक साथ लाता है जो तय करती हैं कि कब क्या होगा: आपकी चल रही दशा, आपकी कुंडली पर धीमे ग्रहों का गोचर, और आज के दिन का गुण। यह रोज़ के सवाल का जवाब देता है कि क्या अभी अच्छा समय है, और कारण भी सामने रखता है।

दशा की परत

ऊपर की पट्टी आपकी चालू महादशा, अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा उनकी तिथियों सहित दिखाती है। हर अवधि के ग्रह का एक वाक्य में वर्णन होता है: आपकी कुंडली में वह किन भावों का स्वामी है और कौन से विषय आगे लाता है।

गोचर की परत

बीच की पट्टी शनि, बृहस्पति, राहु और केतु को आपकी कुंडली के भावों से गुज़रते दिखाती है, हर एक के अगले राशि परिवर्तन के साथ; साढ़ेसाती या ढैया चल रही हो तो वह भी।

दिन की परत

नीचे की पट्टी आज दिखाती है: पंचांग के पाँच अंग, आपका ताराबल और चंद्रबल, इस घंटे की होरा, और राहुकाल, यमगंड व गुलिक काल।

परतों को साथ पढ़ना

अच्छी दशा के भीतर, सहायक गोचर के साथ, अच्छा दिन शुरुआत का सबसे मज़बूत समय है। दशा अनुकूल हो पर दिन नहीं, तो उसी सप्ताह किसी अच्छे दिन की प्रतीक्षा कीजिए। दशा कठिन हो तो साहसी नई शुरुआत की जगह स्थिर काम चुनिए, और अच्छे दिनों को छोटे कदमों के लिए रखिए।

आगे की योजना

तिथि आगे बढ़ाकर देखिए कि आने वाले हफ़्तों और महीनों में परतें कैसे बैठती हैं, और सबसे अच्छे अंक वाले दिनों के लिए अनुस्मारक लगाइए।

एक उदाहरण

मान लीजिए आप बृहस्पति की दशा में हैं और बृहस्पति आपके दसवें भाव यानी काम का स्वामी है। बृहस्पति अभी चंद्रमा से ग्यारहवीं राशि से गुज़र रहा है, जो अच्छा गोचर है। आज चंद्रमा आपकी संपत तारा में है और घड़ी सूर्य की होरा की है। प्रस्ताव भेजने या नई ज़िम्मेदारी लेने का यह उत्तम क्षण है। यदि आज चंद्रमा आपकी आठवीं राशि में होता, तो सलाह होती कि अभी तैयारी कीजिए और उसी अच्छी दशा और गोचर के भीतर दो दिन बाद कदम उठाइए।

सरल रखिए

इस दृश्य को उपयोग करने के लिए हर परत समझना ज़रूरी नहीं। ऊपर की सार पंक्ति दिन का सीधा उत्तर एक छोटे कारण के साथ देती है, और गहराई में जाना चाहें तो विवरण मौजूद हैं।

काल ही ईश्वर का रूप

परंपरा कहती है कि काल स्वयं ईश्वर का रूप है; गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं, कालोऽस्मि, मैं काल हूँ। उत्तर भारत के घरों में शुभ घड़ी देखकर निकलना, दिशाशूल का ध्यान, राहुकाल में नया काम न शुरू करना और भोर में सूर्य को अर्घ्य देकर दिन शुरू करना उसी विश्वास के रूप हैं। लंबी दशा, मध्यम गोचर और छोटे दिन, तीनों का ताल मिलाना ही सही समय है, यह ऋषियों की दृष्टि है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रत्यंतर दशा क्या है?

दशा का तीसरा स्तर, जो कुछ हफ़्तों से कुछ महीनों तक चलता है।

कौन सी परत सबसे अहम है?

दशा वादा तय करती है, गोचर समय बताता है, और दिन उसे बारीकी से साधता है।

होरा क्या है?

ग्रह का घंटा। दिन का हर घंटा सात ग्रहों में से किसी एक के अधीन होता है।

क्या एक महीना पहले योजना बना सकते हैं?

हाँ। तिथि को भविष्य के किसी भी दिन पर ले जाइए।

क्या जन्म समय चाहिए?

हाँ, दशा और भावों के लिए।

दशा कठिन हो तो?

स्थिर प्रयास पर ध्यान दीजिए और अच्छे दिनों को अहम छोटे कदमों के लिए रखिए।

क्या राहुकाल मेरे शहर का है?

हाँ। यह स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर है।

क्या अनुस्मारक मिल सकते हैं?

हाँ, अच्छे दिनों और राशि परिवर्तनों के लिए।

यह दैनिक राशिफल से कैसे अलग है?

यह केवल चंद्र राशि नहीं, आपकी पूरी कुंडली से बनता है।

अभिजित मुहूर्त क्या है?

स्थानीय दोपहर के आसपास का समय, जो बुधवार छोड़कर अधिकतर कामों के लिए शुभ माना जाता है।

क्या साढ़ेसाती दिखती है?

हाँ, गोचर की परत में।

क्या किसी और के लिए उपयोग कर सकते हैं?

हाँ। किसी भी सहेजी कुंडली पर जाइए।

सार पंक्ति रुकने को क्यों कहती है?

अक्सर इसलिए कि आज चंद्रमा आपकी आठवीं राशि या प्रतिकूल तारा में है, जबकि बड़ी अवधियाँ ठीक हैं। एक दो दिन बाद अक्सर बेहतर होता है।

क्या ढैया शामिल है?

हाँ। चंद्रमा से आठवीं राशि का शनि तिथियों सहित गोचर की परत में दिखता है।

क्या बीती तिथियाँ देख सकते हैं?

हाँ। तिथि पीछे ले जाकर देखिए कि किसी पुरानी घटना के समय परतें कैसी थीं।