पंचांग
पंचांग.
Almanac
पूरा साल एक नज़र में देखें, हर दिन का रंग बताता है कि वह मुहूर्त के लिए कितना शुभ है।
शुभ दिन
पंचांग रंग तालिका पूरे महीने को एक ही दृश्य में दिखाती है और हर दिन को इस हिसाब से रंगती है कि वह आपके लिए कितना शुभ है। यह दिन के पाँच अंगों के साथ आपका ताराबल और चंद्रबल भी जोड़ती है, ताकि हर दिन अलग से पढ़े बिना शुभारंभ, यात्रा या ख़रीदारी के अच्छे दिन दिख जाएँ।
हर दिन तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण से आँका जाता है, फिर आपके जन्म नक्षत्र और राशि के अनुसार सुधारा जाता है। गहरा रंग अच्छा दिन है। अमावस्या, आपकी राशि का चंद्राष्टम, या व्यतीपात और वैधृति जैसे कठिन योगों वाले दिन हल्के रंग में दिखते हैं।
ताराबल आपके जन्म नक्षत्र से उस दिन के नक्षत्र तक गिनकर परिणाम को नौ ताराओं में बाँटता है। संपत, क्षेम, साधक, मित्र और परम मित्र शुभ हैं; जन्म, विपत, प्रत्यक और नैधन सावधानी माँगते हैं।
चंद्रबल उस दिन चंद्रमा की राशि को आपकी राशि से गिनता है। पहला, तीसरा, छठा, सातवाँ, दसवाँ और ग्यारहवाँ स्थान अच्छा है; आठवाँ, जिसे चंद्राष्टम कहते हैं, ज़्यादातर परिवार शुभारंभ के लिए टालते हैं।
यात्रा, वाहन ख़रीद, विद्यारंभ या गृह प्रवेश जैसा उद्देश्य चुनिए। तालिका फिर उस काम के लिए उपयुक्त नक्षत्र और तिथियाँ लगाती है। विवाह और गृह प्रवेश के सही लग्न के लिए आगे मुहूर्त खोज देखिए।
किसी भी दिन को छूकर पूरा पंचांग देखिए: सूर्योदय, समाप्ति समय सहित पाँच अंग, राहुकाल, यमगंड, गुलिक काल और दिन के शुभ समय।
परंपरा नए कामों के लिए कुछ दिन अलग रखती है। अमावस्या और चंद्राष्टम का दिन सबसे अधिक टाले जाते हैं। चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी, जिन्हें रिक्ता तिथि कहते हैं, शुरुआत के लिए खाली मानी जाती हैं। व्यतीपात और वैधृति योग, और विष्टि करण जिसे भद्रा भी कहते हैं, महत्वपूर्ण कामों से दूर रखे जाते हैं। तालिका इन सबको तौलती है, इसलिए सबसे गहरा रंग उन्हीं दिनों पर आता है जो आपके नक्षत्र के लिए हर सामान्य कसौटी पर खरे उतरते हैं।
किसी पारिवारिक आयोजन के लिए मुख्य लोगों का जन्म विवरण जोड़िए। तालिका फिर वे दिन दिखाती है जो सबके लिए एक साथ ठीक हों, जिससे हर व्यक्ति के लिए दिन दर दिन पंचांग पलटने की ज़रूरत नहीं रहती।
उत्तर भारत में भद्रा का विचार घर घर में होता है: रक्षाबंधन पर राखी भद्रा बीतने के बाद बाँधी जाती है, और होलिका दहन भी भद्रा रहित समय में होता है। घर के बड़े पंचांग देखकर यात्रा की दिशा, दिशाशूल और शुभ घड़ी बताते थे। ऋषियों ने शुक्ल पक्ष को आरंभ और कृष्ण पक्ष को समापन के अनुकूल माना, क्योंकि चंद्रमा की बढ़ती रोशनी के साथ काम भी बढ़ता है। उसी महीने भर की लय को यह तालिका एक नज़र में दिखाती है।
हाँ, जब आप अपना जन्म नक्षत्र और राशि जोड़ते हैं।
जन्म नक्षत्र से उस दिन के नक्षत्र तक की गिनती, नौ प्रकारों में बँटी।
उस दिन चंद्रमा की राशि को आपकी अपनी राशि से गिनना।
आपका ताराबल या चंद्रबल प्रतिकूल हो सकता है।
दिन छाँटने के लिए कीजिए, फिर मुहूर्त खोज से पक्का कीजिए।
हाँ। सूर्योदय और दिन के अंग आपके स्थान के लिए निकाले जाते हैं।
आपकी राशि से आठवीं राशि में चंद्रमा, हर महीने लगभग सवा दो दिन।
हाँ, हर दिन के विवरण में।
हाँ। तीर के निशानों से महीने बदलिए।
हाँ। त्योहार वाले दिनों पर छोटा चिह्न रहता है।
नए कामों के लिए टाली जाती है, पर पितरों के तर्पण के लिए अच्छा दिन है।
हाँ। दिन छूकर साझा करने का विकल्प चुनिए।
हाँ। राहुकाल, यमगंड और गुलिक हर दिन आते हैं, इसलिए सबसे अच्छे दिन भी उनसे बाहर और किसी सहायक होरा में शुरू कीजिए।
तालिका तब सबके लिए एक साथ अच्छे दिन खोजती है, इसलिए केवल एक के लिए ठीक दिन हल्का दिखता है।
यात्रा, वाहन ख़रीद, विद्यारंभ, संपत्ति, दुकान का शुभारंभ, नामकरण, गृह प्रवेश और सामान्य नए काम।