नक्षत्र गुण मिलान
रेवती और पूर्व फाल्गुनी गुण मिलान
रेवती और पूर्व फाल्गुनी के नक्षत्र कूटों में से 7 में से केवल 3 मिलते हैं; नक्षत्र आधारित अष्टकूट में 21 में से 6 गुण। परिवार प्रायः अधिक मेल या स्पष्ट छूट खोजते हैं।
- नक्षत्र कूट
- 3/7
- नक्षत्र आधारित अष्टकूट
- 6/21
समग्र चित्र
रेवती और पूर्व फाल्गुनी के नक्षत्र कूटों में से 7 में से केवल 3 मिलते हैं; नक्षत्र आधारित अष्टकूट में 21 में से 6 गुण। परिवार प्रायः अधिक मेल या स्पष्ट छूट खोजते हैं।
नक्षत्र गिनती: तारा
रेवती से पूर्व फाल्गुनी तक गिनने पर विपत तारा आती है। परंपरा इसे सावधानी से देखती है और जाँचती है कि गण, योनि, राशि स्वामी इसे संतुलित करते हैं या नहीं। बहुत से परिवार विवाह के दिन छोटी शांति कराते हैं।
दो नक्षत्रों का स्वभाव
एक नक्षत्र देव गण का, दूसरा मनुष्य गण का। आदर्श और व्यावहारिक स्नेह साथ आते हैं; गुण मिलान इस जोड़ी को अनुकूल मानता है, क्योंकि दोनों स्वभाव एक दूसरे को पूरा करते हैं।
नाड़ी दोष
दोनों नक्षत्र एक ही नाड़ी में हैं, इसलिए अष्टकूट में नाड़ी के गुण नहीं मिलते। कुछ स्थितियों में शास्त्र छूट देता है; पूरी कुंडली देखना उचित है।
रज्जु
दोनों नक्षत्र एक ही रज्जु समूह में हैं। दक्षिण की परंपरा इसे गंभीर मानती है; निर्णय से पहले पंडित जी से छूट के बारे में बात करें।
नक्षत्रों से ही पता चलने वाले कूट
दिन, गण, माहेंद्र, स्त्री दीर्घ, योनि, रज्जु और वेध, ये सात कूट दो जन्म नक्षत्रों से ही गिने जाते हैं। अष्टकूट के आठ अंगों में से तारा, योनि, गण और नाड़ी नक्षत्र पर टिके हैं (36 में से 21 गुण); वर्ण, वश्य, ग्रह मैत्री और भकूट के लिए चंद्र राशि चाहिए, जो राशि मिलान के पन्नों पर है। उत्तर भारत में गुण मिलान के साथ मांगलिक दोष भी देखा जाता है।
पहले वधू का नक्षत्र
परंपरा के अनुसार गिनती वधू के नक्षत्र से शुरू होती है, इसलिए रेवती से पूर्व फाल्गुनी तक का फल उलटी जोड़ी के लिए अलग आ सकता है। नाड़ी और भकूट को सबसे अधिक गुण मिलते हैं। दोनों पूरी कुंडलियाँ पंडित जी देख लें, तभी परिवार सगाई की ओर बढ़ते हैं।
| कूट | परिणाम | अर्थ |
|---|---|---|
| दिन | ध्यान दें | नक्षत्र गिनती अनुकूल दिन शेष में नहीं आती। |
| गण | मिलता है | दोनों के स्वभाव (गण) मिलते हैं। |
| माहेंद्र | ध्यान दें | माहेंद्र नहीं; बहुत से लोग इसे छोटा अंग मानते हैं। |
| स्त्री दीर्घ | मिलता है | वर का नक्षत्र वधू के नक्षत्र से पर्याप्त दूर है, समृद्धि के लिए शुभ। |
| योनि | ध्यान दें | योनि पशु आपस में बैरी। |
| रज्जु | ध्यान दें | एक ही रज्जु: रज्जु दोष। |
| वेध | मिलता है | नक्षत्रों में वेध नहीं। |
| कूट | गुण |
|---|---|
| तारा | 0/3 |
| योनि | 0/4 |
| गण | 6/6 |
| नाड़ी | 0/8 |
सामान्य प्रश्न
क्या रेवती और पूर्व फाल्गुनी के विवाह के लिए गुण मिलते हैं?
नक्षत्र आधारित 7 कूटों में से 3 मिलते हैं, और नक्षत्र आधारित अष्टकूट में 21 में से 6 गुण आते हैं। अधिकतर परिवार नाड़ी, भकूट और रज्जु विशेष रूप से देखते हैं।
क्या रेवती और पूर्व फाल्गुनी में नाड़ी दोष है?
अष्टकूट तालिका में नाड़ी के गुण देखें: 8 का अर्थ अलग नाड़ी, दोष नहीं; 0 का अर्थ एक ही नाड़ी। कुछ नियम पूरे हों तो शास्त्र छूट देता है।
क्या रेवती और पूर्व फाल्गुनी में रज्जु दोष है?
इस जोड़ी का रज्जु परिणाम कूट तालिका में है। दोनों नक्षत्र एक ही रज्जु समूह में हों तो रज्जु दोष माना जाता है।
कितने गुण मिलें तो विवाह तय होता है?
आम तौर पर 36 में से 18 से अधिक गुण, और नाड़ी व भकूट दोष न होना शुभ माना जाता है। कुल की रीति के अनुसार अंतर होता है, पंडित जी की सलाह लें।
जोड़ी उलटने पर परिणाम क्यों बदलता है?
कुछ कूट वधू के नक्षत्र से वर के नक्षत्र तक गिने जाते हैं, इसलिए स्थान बदले तो गिनती बदलती है। तुलना के लिए उलटी जोड़ी का लिंक देखें।
दोनों का एक ही नक्षत्र हो तो?
एक ही नक्षत्र के लिए दिन कूट में विशेष नियम हैं, जो नक्षत्र और चरण के अनुसार बदलते हैं। परिणाम तालिका उन्हीं नियमों का पालन करती है।
पूरा कुंडली मिलान कैसे मिले?
दोनों का जन्म विवरण गुण मिलान साधन में भरें; छत्तीसों गुण, राशि आधारित अंग और मांगलिक दोष की जाँच दिखेगी।
रेवती से पूर्व फाल्गुनी तक कौन सी तारा आती है?
वधू के नक्षत्र से वर के नक्षत्र तक नौ नौ के समूहों में गिनना ही तारा है। ऊपर का तारा भाग वह गिनती और परंपरा का अर्थ बताता है।
क्या रेवती और पूर्व फाल्गुनी के गण मिलते हैं?
हर नक्षत्र देव, मनुष्य या राक्षस गण का होता है। ऊपर का स्वभाव भाग इन दो नक्षत्रों के गण और मिलान में उनका अर्थ समझाता है।
मांगलिक दोष कैसे देखा जाता है?
लग्न, चंद्रमा और शुक्र से मंगल किस भाव में है, यह देखकर मांगलिक दोष विचारा जाता है; इसके लिए पूरी कुंडली चाहिए। दोनों मांगलिक हों तो दोष प्रायः कट जाता है।
नक्षत्र मिलने के बाद क्या देखें?
दोनों की पूरी कुंडलियाँ, सातवाँ भाव, शुक्र और मंगल की स्थिति और चल रही दशा देखकर फिर पंचांग से विवाह का मुहूर्त निकलवाया जाता है।
क्या रिश्ते से पहले कुंडली मिलाई जाती है?
बहुत से घरों में लड़की देखने जाने से पहले ही पंडित जी कुंडली मिला देते हैं; गुण मिलें तभी बात आगे बढ़ती है।
गुण कम आएँ तो कोई उपाय है?
परंपरा में नवग्रह शांति, नाड़ी दोष के लिए दान, कुलदेवता की पूजा जैसे उपाय बताए गए हैं। कौन सा उचित है, यह पूरी कुंडली देखने वाले पंडित जी बताएँगे।