दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, शनि, 9 अगस्त 2031
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:28 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र अश्विनी, योग शूल और करण बव है। राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:28
- सूर्यास्त
- शाम 6:38
- तिथि
- सप्तमी · शाम 5:27 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी · सुबह 11:34 तक
- योग
- शूल
- करण
- बव
- वार
- शनिवार
- राहु काल
- सुबह 8:46 – सुबह 10:24
- यमगंड
- दोपहर 1:42 – दोपहर 3:20
- गुलिक काल
- तड़के 5:28 – सुबह 7:07
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- दोपहर 2:31 – शाम 4:10
आज वाराणसी में
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:28 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र अश्विनी, योग शूल और करण बव है। राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| रवि, 10 अगस्त 2031 | अष्टमी | भरणी | शाम 4:58 – शाम 6:37 |
| सोम, 11 अगस्त 2031 | नवमी | कृत्तिका | सुबह 7:08 – सुबह 8:46 |
| मंगल, 12 अगस्त 2031 | दशमी | रोहिणी | दोपहर 3:19 – शाम 4:57 |
| बुध, 13 अगस्त 2031 | एकादशी | मृगशिरा | दोपहर 12:02 – दोपहर 1:40 |
| गुरु, 14 अगस्त 2031 | द्वादशी | आर्द्रा | दोपहर 1:40 – दोपहर 3:18 |
| शुक्र, 15 अगस्त 2031 | त्रयोदशी | पुनर्वसु | सुबह 10:24 – दोपहर 12:02 |
सामान्य प्रश्न
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; शाम 5:27 तक।
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अश्विनी है; सुबह 11:34 तक।
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल सुबह 8:46 – सुबह 10:24 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शनि, 9 अगस्त 2031 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:28 और सूर्यास्त शाम 6:38 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।