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दैनिक पंचांग

वाराणसी पंचांग, मंगल, 17 दिसंबर 2030

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी, योग विष्कम्भ और करण बव है। राहु काल दोपहर 2:32 – दोपहर 3:51 है।

सूर्योदय
सुबह 6:36
सूर्यास्त
शाम 5:11
तिथि
सप्तमी · शाम 5:30 तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी · रात 8:03 तक
योग
विष्कम्भ
करण
बव
वार
मंगलवार
राहु काल
दोपहर 2:32 – दोपहर 3:51
यमगंड
सुबह 9:15 – सुबह 10:34
गुलिक काल
सुबह 11:54 – दोपहर 1:13
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:27 – दोपहर 12:15
अमृत काल
सुबह 8:35 – सुबह 9:55

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आज वाराणसी में

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:36 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी, योग विष्कम्भ और करण बव है। राहु काल दोपहर 2:32 – दोपहर 3:51 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

वाराणसी – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
बुध, 18 दिसंबर 2030अष्टमीउत्तरा फाल्गुनीसुबह 11:54 – दोपहर 1:13
गुरु, 19 दिसंबर 2030नवमीहस्तदोपहर 1:14 – दोपहर 2:33
शुक्र, 20 दिसंबर 2030दशमीचित्रासुबह 10:36 – सुबह 11:55
शनि, 21 दिसंबर 2030एकादशीस्वातीसुबह 9:17 – सुबह 10:36
रवि, 22 दिसंबर 2030द्वादशीविशाखादोपहर 3:54 – शाम 5:13
सोम, 23 दिसंबर 2030त्रयोदशीअनुराधासुबह 7:59 – सुबह 9:18

सामान्य प्रश्न

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; शाम 5:30 तक।

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी है; रात 8:03 तक।

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?

वाराणसी में राहु काल दोपहर 2:32 – दोपहर 3:51 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

मंगल, 17 दिसंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय सुबह 6:36 और सूर्यास्त शाम 5:11 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।