दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, रवि, 17 नवंबर 2030
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र पुष्य, योग शुभ और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:47 – शाम 5:09 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:16
- सूर्यास्त
- शाम 5:09
- तिथि
- सप्तमी · रात 1:30 तक
- नक्षत्र
- पुष्य · सुबह 8:50 तक
- योग
- शुभ
- करण
- विष्टि
- वार
- रविवार
- राहु काल
- दोपहर 3:47 – शाम 5:09
- यमगंड
- सुबह 11:42 – दोपहर 1:04
- गुलिक काल
- दोपहर 2:26 – दोपहर 3:47
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:15 – दोपहर 12:03
- अमृत काल
- दोपहर 12:23 – दोपहर 1:45
आज वाराणसी में
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:16 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र पुष्य, योग शुभ और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 3:47 – शाम 5:09 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 18 नवंबर 2030 | अष्टमी | आश्लेषा | सुबह 7:38 – सुबह 9:00 |
| मंगल, 19 नवंबर 2030 | नवमी | मघा | दोपहर 2:26 – दोपहर 3:47 |
| बुध, 20 नवंबर 2030 | दशमी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 11:43 – दोपहर 1:04 |
| गुरु, 21 नवंबर 2030 | एकादशी | उत्तरा फाल्गुनी | दोपहर 1:04 – दोपहर 2:26 |
| शुक्र, 22 नवंबर 2030 | द्वादशी | हस्त | सुबह 10:23 – सुबह 11:44 |
| शनि, 23 नवंबर 2030 | त्रयोदशी | चित्रा | सुबह 9:02 – सुबह 10:23 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; रात 1:30 तक।
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुष्य है; सुबह 8:50 तक।
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल दोपहर 3:47 – शाम 5:09 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 17 नवंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:16 और सूर्यास्त शाम 5:09 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।