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दैनिक पंचांग

वाराणसी पंचांग, गुरु, 26 सितंबर 2030

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:48 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी, योग साध्य और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 1:19 – दोपहर 2:49 है।

सूर्योदय
तड़के 5:48
सूर्यास्त
शाम 5:50
तिथि
चतुर्दशी · शाम 5:15 तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी · शाम 4:25 तक
योग
साध्य
करण
विष्टि
वार
गुरुवार
राहु काल
दोपहर 1:19 – दोपहर 2:49
यमगंड
तड़के 5:48 – सुबह 7:18
गुलिक काल
सुबह 8:48 – सुबह 10:19
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:19 – दोपहर 12:07
अमृत काल
सुबह 11:04 – दोपहर 12:34

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आज वाराणसी में

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:48 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी, नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी, योग साध्य और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 1:19 – दोपहर 2:49 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

वाराणसी – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
शुक्र, 27 सितंबर 2030अमावस्याउत्तरा फाल्गुनीसुबह 10:18 – सुबह 11:48
शनि, 28 सितंबर 2030प्रतिपदाहस्तसुबह 8:48 – सुबह 10:18
रवि, 29 सितंबर 2030द्वितीयाचित्राशाम 4:17 – शाम 5:47
सोम, 30 सितंबर 2030तृतीयास्वातीसुबह 7:19 – सुबह 8:48
मंगल, 1 अक्टूबर 2030पंचमीविशाखादोपहर 2:46 – शाम 4:15
बुध, 2 अक्टूबर 2030षष्ठीअनुराधासुबह 11:47 – दोपहर 1:16

सामान्य प्रश्न

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि चतुर्दशी है; शाम 5:15 तक।

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी है; शाम 4:25 तक।

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?

वाराणसी में राहु काल दोपहर 1:19 – दोपहर 2:49 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

गुरु, 26 सितंबर 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय तड़के 5:48 और सूर्यास्त शाम 5:50 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।