दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, रवि, 28 अप्रैल 2030
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:24 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग ब्रह्म और करण बालव है। राहु काल शाम 4:49 – शाम 6:27 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:24
- सूर्यास्त
- शाम 6:27
- तिथि
- एकादशी · दोपहर 12:28 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद · रात 3:04 तक
- योग
- ब्रह्म
- करण
- बालव
- वार
- रविवार
- राहु काल
- शाम 4:49 – शाम 6:27
- यमगंड
- सुबह 11:55 – दोपहर 1:33
- गुलिक काल
- दोपहर 3:11 – शाम 4:49
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:23 – दोपहर 12:11
- अमृत काल
- दोपहर 12:44 – दोपहर 2:22
आज वाराणसी में
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:24 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग ब्रह्म और करण बालव है। राहु काल शाम 4:49 – शाम 6:27 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 29 अप्रैल 2030 | द्वादशी | उत्तरा भाद्रपद | सुबह 7:01 – सुबह 8:39 |
| मंगल, 30 अप्रैल 2030 | त्रयोदशी | रेवती | दोपहर 3:11 – शाम 4:49 |
| बुध, 1 मई 2030 | चतुर्दशी | रेवती | सुबह 11:55 – दोपहर 1:33 |
| गुरु, 2 मई 2030 | अमावस्या | अश्विनी | दोपहर 1:33 – दोपहर 3:12 |
| शुक्र, 3 मई 2030 | प्रतिपदा | भरणी | सुबह 10:16 – सुबह 11:55 |
| शनि, 4 मई 2030 | द्वितीया | कृत्तिका | सुबह 8:37 – सुबह 10:16 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि एकादशी है; दोपहर 12:28 तक।
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है; रात 3:04 तक।
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल शाम 4:49 – शाम 6:27 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 28 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:24 और सूर्यास्त शाम 6:27 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।