दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, गुरु, 11 अप्रैल 2030
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:39 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग अतिगण्ड और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 1:34 – दोपहर 3:09 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:39
- सूर्यास्त
- शाम 6:18
- तिथि
- अष्टमी · रात 9:01 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · रात 8:41 तक
- योग
- अतिगण्ड
- करण
- विष्टि
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:34 – दोपहर 3:09
- यमगंड
- तड़के 5:39 – सुबह 7:14
- गुलिक काल
- सुबह 8:49 – सुबह 10:24
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:27 – दोपहर 12:15
- अमृत काल
- सुबह 11:11 – दोपहर 12:46
आज वाराणसी में
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय तड़के 5:39 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पुनर्वसु, योग अतिगण्ड और करण विष्टि है। राहु काल दोपहर 1:34 – दोपहर 3:09 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 12 अप्रैल 2030 | नवमी | पुष्य | सुबह 10:24 – सुबह 11:59 |
| शनि, 13 अप्रैल 2030 | दशमी | आश्लेषा | सुबह 8:48 – सुबह 10:23 |
| रवि, 14 अप्रैल 2030 | एकादशी | मघा | शाम 4:44 – शाम 6:20 |
| सोम, 15 अप्रैल 2030 | द्वादशी | पूर्वा फाल्गुनी | सुबह 7:11 – सुबह 8:47 |
| मंगल, 16 अप्रैल 2030 | त्रयोदशी | उत्तरा फाल्गुनी | दोपहर 3:09 – शाम 4:45 |
| बुध, 17 अप्रैल 2030 | चतुर्दशी | हस्त | सुबह 11:57 – दोपहर 1:33 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि अष्टमी है; रात 9:01 तक।
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; रात 8:41 तक।
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल दोपहर 1:34 – दोपहर 3:09 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 11 अप्रैल 2030 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:39 और सूर्यास्त शाम 6:18 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।