दैनिक पंचांग
वाराणसी पंचांग, रवि, 23 दिसंबर 2029
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पुनर्वसु, योग ब्रह्म और करण गर है। राहु काल दोपहर 3:54 – शाम 5:14 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:40
- सूर्यास्त
- शाम 5:14
- तिथि
- द्वितीया · सुबह 6:30 तक
- नक्षत्र
- पुनर्वसु · सुबह 10:31 तक
- योग
- ब्रह्म
- करण
- गर
- वार
- रविवार
- राहु काल
- दोपहर 3:54 – शाम 5:14
- यमगंड
- सुबह 11:57 – दोपहर 1:16
- गुलिक काल
- दोपहर 2:35 – दोपहर 3:54
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:30 – दोपहर 12:18
- अमृत काल
- दोपहर 12:36 – दोपहर 1:56
आज वाराणसी में
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:40 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वितीया, नक्षत्र पुनर्वसु, योग ब्रह्म और करण गर है। राहु काल दोपहर 3:54 – शाम 5:14 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| सोम, 24 दिसंबर 2029 | तृतीया | पुष्य | सुबह 7:59 – सुबह 9:19 |
| मंगल, 25 दिसंबर 2029 | चतुर्थी | आश्लेषा | दोपहर 2:36 – दोपहर 3:55 |
| बुध, 26 दिसंबर 2029 | पंचमी | मघा | सुबह 11:58 – दोपहर 1:17 |
| गुरु, 27 दिसंबर 2029 | सप्तमी | पूर्वा फाल्गुनी | दोपहर 1:18 – दोपहर 2:37 |
| शुक्र, 28 दिसंबर 2029 | अष्टमी | उत्तरा फाल्गुनी | सुबह 10:40 – सुबह 11:59 |
| शनि, 29 दिसंबर 2029 | नवमी | हस्त | सुबह 9:21 – सुबह 10:40 |
सामान्य प्रश्न
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वितीया है; सुबह 6:30 तक।
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पुनर्वसु है; सुबह 10:31 तक।
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में राहु काल कब है?
वाराणसी में राहु काल दोपहर 3:54 – शाम 5:14 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
रवि, 23 दिसंबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:40 और सूर्यास्त शाम 5:14 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।