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दैनिक पंचांग

वाराणसी पंचांग, मंगल, 30 अक्टूबर 2029

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:04 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पुष्य, योग सिद्ध और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:30 – दोपहर 3:54 है।

सूर्योदय
सुबह 6:04
सूर्यास्त
शाम 5:18
तिथि
अष्टमी · तड़के 4:55 तक
नक्षत्र
पुष्य · रात 11:40 तक
योग
सिद्ध
करण
बालव
वार
मंगलवार
राहु काल
दोपहर 2:30 – दोपहर 3:54
यमगंड
सुबह 8:53 – सुबह 10:17
गुलिक काल
सुबह 11:41 – दोपहर 1:05
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:13 – दोपहर 12:01
अमृत काल
सुबह 8:11 – सुबह 9:35

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आज वाराणसी में

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय सुबह 6:04 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पुष्य, योग सिद्ध और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:30 – दोपहर 3:54 है।

ये समय कैसे निकाले जाते हैं

इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।

वाराणसी – अगले छह दिन
तिथि (दिनांक)तिथिनक्षत्रराहु काल
बुध, 31 अक्टूबर 2029नवमीआश्लेषासुबह 11:41 – दोपहर 1:05
गुरु, 1 नवंबर 2029दशमीमघादोपहर 1:05 – दोपहर 2:29
शुक्र, 2 नवंबर 2029एकादशीपूर्वा फाल्गुनीसुबह 10:17 – सुबह 11:41
शनि, 3 नवंबर 2029द्वादशीउत्तरा फाल्गुनीसुबह 8:54 – सुबह 10:17
रवि, 4 नवंबर 2029त्रयोदशीहस्तदोपहर 3:51 – शाम 5:15
सोम, 5 नवंबर 2029चतुर्दशीचित्रासुबह 7:31 – सुबह 8:54

सामान्य प्रश्न

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में कौन सी तिथि है?

सूर्योदय पर तिथि अष्टमी है; तड़के 4:55 तक।

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में कौन सा नक्षत्र है?

सूर्योदय पर नक्षत्र पुष्य है; रात 11:40 तक।

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में राहु काल कब है?

वाराणसी में राहु काल दोपहर 2:30 – दोपहर 3:54 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।

मंगल, 30 अक्टूबर 2029 को वाराणसी में सूर्योदय कब है?

सूर्योदय सुबह 6:04 और सूर्यास्त शाम 5:18 पर है।

शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?

सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।

कौन सा अयनांश उपयोग होता है?

अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।

क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?

हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।

क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?

ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।