दैनिक पंचांग
उज्जैन पंचांग, मंगल, 8 जनवरी 2030
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में सूर्योदय सुबह 7:09 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र शतभिषा, योग सिद्धि और करण बव है। राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:36 है।
- सूर्योदय
- सुबह 7:09
- सूर्यास्त
- शाम 5:57
- तिथि
- पंचमी · रात 3:30 तक
- नक्षत्र
- शतभिषा · रात 7:12 तक
- योग
- सिद्धि
- करण
- बव
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:15 – शाम 4:36
- यमगंड
- सुबह 9:51 – सुबह 11:12
- गुलिक काल
- दोपहर 12:33 – दोपहर 1:54
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:06 – दोपहर 12:54
- अमृत काल
- सुबह 9:11 – सुबह 10:32
आज उज्जैन में
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में सूर्योदय सुबह 7:09 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पंचमी, नक्षत्र शतभिषा, योग सिद्धि और करण बव है। राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:36 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल उज्जैन के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 9 जनवरी 2030 | षष्ठी | पूर्वा भाद्रपद | दोपहर 12:33 – दोपहर 1:54 |
| गुरु, 10 जनवरी 2030 | सप्तमी | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 1:55 – दोपहर 3:16 |
| शुक्र, 11 जनवरी 2030 | सप्तमी | रेवती | सुबह 11:13 – दोपहर 12:34 |
| शनि, 12 जनवरी 2030 | अष्टमी | अश्विनी | सुबह 9:52 – सुबह 11:13 |
| रवि, 13 जनवरी 2030 | नवमी | भरणी | शाम 4:39 – शाम 6:00 |
| सोम, 14 जनवरी 2030 | दशमी | भरणी | सुबह 8:31 – सुबह 9:53 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पंचमी है; रात 3:30 तक।
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र शतभिषा है; रात 7:12 तक।
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में राहु काल कब है?
उज्जैन में राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:36 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 8 जनवरी 2030 को उज्जैन में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 7:09 और सूर्यास्त शाम 5:57 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।