दैनिक पंचांग
सूरत पंचांग, बुध, 16 जनवरी 2030
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में सूर्योदय सुबह 7:18 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र रोहिणी, योग शुक्ल और करण बव है। राहु काल दोपहर 12:48 – दोपहर 2:10 है।
- सूर्योदय
- सुबह 7:18
- सूर्यास्त
- शाम 6:18
- तिथि
- द्वादशी · शाम 6:34 तक
- नक्षत्र
- रोहिणी · दोपहर 12:58 तक
- योग
- शुक्ल
- करण
- बव
- वार
- बुधवार
- राहु काल
- दोपहर 12:48 – दोपहर 2:10
- यमगंड
- सुबह 8:41 – सुबह 10:03
- गुलिक काल
- सुबह 11:25 – दोपहर 12:48
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:20 – दोपहर 1:08
- अमृत काल
- सुबह 10:44 – दोपहर 12:07
आज सूरत में
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में सूर्योदय सुबह 7:18 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र रोहिणी, योग शुक्ल और करण बव है। राहु काल दोपहर 12:48 – दोपहर 2:10 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल सूरत के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| गुरु, 17 जनवरी 2030 | त्रयोदशी | मृगशिरा | दोपहर 2:11 – दोपहर 3:33 |
| शुक्र, 18 जनवरी 2030 | चतुर्दशी | आर्द्रा | सुबह 11:26 – दोपहर 12:49 |
| शनि, 19 जनवरी 2030 | पूर्णिमा | पुनर्वसु | सुबह 10:03 – सुबह 11:26 |
| रवि, 20 जनवरी 2030 | प्रतिपदा | पुष्य | शाम 4:58 – शाम 6:21 |
| सोम, 21 जनवरी 2030 | द्वितीया | आश्लेषा | सुबह 8:41 – सुबह 10:04 |
| मंगल, 22 जनवरी 2030 | तृतीया | मघा | दोपहर 3:36 – शाम 4:59 |
सामान्य प्रश्न
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; शाम 6:34 तक।
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र रोहिणी है; दोपहर 12:58 तक।
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में राहु काल कब है?
सूरत में राहु काल दोपहर 12:48 – दोपहर 2:10 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
बुध, 16 जनवरी 2030 को सूरत में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 7:18 और सूर्यास्त शाम 6:18 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।