दैनिक पंचांग
सूरत पंचांग, मंगल, 11 सितंबर 2029
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में सूर्योदय सुबह 6:24 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र चित्रा, योग शुक्ल और करण गर है। राहु काल दोपहर 3:40 – शाम 5:12 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:24
- सूर्यास्त
- शाम 6:45
- तिथि
- तृतीया · सुबह 6:09 तक
- नक्षत्र
- चित्रा · शाम 4:25 तक
- योग
- शुक्ल
- करण
- गर
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:40 – शाम 5:12
- यमगंड
- सुबह 9:29 – सुबह 11:02
- गुलिक काल
- दोपहर 12:35 – दोपहर 2:07
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:04 – दोपहर 12:52
- अमृत काल
- सुबह 8:43 – सुबह 10:16
आज सूरत में
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में सूर्योदय सुबह 6:24 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र चित्रा, योग शुक्ल और करण गर है। राहु काल दोपहर 3:40 – शाम 5:12 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल सूरत के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 12 सितंबर 2029 | पंचमी | स्वाती | दोपहर 12:34 – दोपहर 2:07 |
| गुरु, 13 सितंबर 2029 | षष्ठी | विशाखा | दोपहर 2:06 – दोपहर 3:38 |
| शुक्र, 14 सितंबर 2029 | सप्तमी | अनुराधा | सुबह 11:01 – दोपहर 12:34 |
| शनि, 15 सितंबर 2029 | अष्टमी | ज्येष्ठा | सुबह 9:29 – सुबह 11:01 |
| रवि, 16 सितंबर 2029 | नवमी | मूल | शाम 5:08 – शाम 6:40 |
| सोम, 17 सितंबर 2029 | दशमी | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 7:57 – सुबह 9:29 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; सुबह 6:09 तक।
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र चित्रा है; शाम 4:25 तक।
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में राहु काल कब है?
सूरत में राहु काल दोपहर 3:40 – शाम 5:12 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 11 सितंबर 2029 को सूरत में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:24 और सूर्यास्त शाम 6:45 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।