दैनिक पंचांग
सूरत पंचांग, मंगल, 3 जुलाई 2029
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में सूर्योदय सुबह 6:01 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग सौभाग्य और करण बव है। राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:44 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:01
- सूर्यास्त
- रात 7:24
- तिथि
- सप्तमी · सुबह 10:21 तक
- नक्षत्र
- उत्तरा भाद्रपद · रात 9:09 तक
- योग
- सौभाग्य
- करण
- बव
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- शाम 4:03 – शाम 5:44
- यमगंड
- सुबह 9:22 – सुबह 11:02
- गुलिक काल
- दोपहर 12:42 – दोपहर 2:23
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:09 – दोपहर 12:57
- अमृत काल
- सुबह 8:31 – सुबह 10:12
आज सूरत में
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में सूर्योदय सुबह 6:01 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि सप्तमी, नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद, योग सौभाग्य और करण बव है। राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:44 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल सूरत के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 4 जुलाई 2029 | अष्टमी | रेवती | दोपहर 12:43 – दोपहर 2:23 |
| गुरु, 5 जुलाई 2029 | नवमी | अश्विनी | दोपहर 2:23 – शाम 4:03 |
| शुक्र, 6 जुलाई 2029 | दशमी | भरणी | सुबह 11:03 – दोपहर 12:43 |
| शनि, 7 जुलाई 2029 | एकादशी | भरणी | सुबह 9:23 – सुबह 11:03 |
| रवि, 8 जुलाई 2029 | द्वादशी | कृत्तिका | शाम 5:44 – रात 7:24 |
| सोम, 9 जुलाई 2029 | त्रयोदशी | रोहिणी | सुबह 7:43 – सुबह 9:23 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि सप्तमी है; सुबह 10:21 तक।
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद है; रात 9:09 तक।
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में राहु काल कब है?
सूरत में राहु काल शाम 4:03 – शाम 5:44 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 3 जुलाई 2029 को सूरत में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:01 और सूर्यास्त रात 7:24 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।