दैनिक पंचांग
सेलम पंचांग, सोम, 22 अक्टूबर 2029
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में सूर्योदय सुबह 6:07 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र अश्विनी, योग व्याघात और करण बव है। राहु काल सुबह 7:36 – सुबह 9:04 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:07
- सूर्यास्त
- शाम 5:55
- तिथि
- पूर्णिमा · दोपहर 2:58 तक
- नक्षत्र
- अश्विनी · सुबह 7:50 तक
- योग
- व्याघात
- करण
- बव
- वार
- सोमवार
- राहु काल
- सुबह 7:36 – सुबह 9:04
- यमगंड
- सुबह 10:33 – दोपहर 12:01
- गुलिक काल
- दोपहर 1:30 – दोपहर 2:58
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:32 – दोपहर 12:20
- अमृत काल
- सुबह 6:51 – सुबह 8:20
आज सेलम में
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में सूर्योदय सुबह 6:07 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा, नक्षत्र अश्विनी, योग व्याघात और करण बव है। राहु काल सुबह 7:36 – सुबह 9:04 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल सेलम के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| मंगल, 23 अक्टूबर 2029 | प्रतिपदा | अश्विनी | दोपहर 2:58 – शाम 4:26 |
| बुध, 24 अक्टूबर 2029 | द्वितीया | भरणी | दोपहर 12:01 – दोपहर 1:29 |
| गुरु, 25 अक्टूबर 2029 | तृतीया | कृत्तिका | दोपहर 1:29 – दोपहर 2:58 |
| शुक्र, 26 अक्टूबर 2029 | चतुर्थी | रोहिणी | सुबह 10:33 – दोपहर 12:01 |
| शनि, 27 अक्टूबर 2029 | पंचमी | मृगशिरा | सुबह 9:04 – सुबह 10:33 |
| रवि, 28 अक्टूबर 2029 | षष्ठी | आर्द्रा | शाम 4:25 – शाम 5:53 |
सामान्य प्रश्न
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि पूर्णिमा है; दोपहर 2:58 तक।
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र अश्विनी है; सुबह 7:50 तक।
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में राहु काल कब है?
सेलम में राहु काल सुबह 7:36 – सुबह 9:04 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
सोम, 22 अक्टूबर 2029 को सेलम में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:07 और सूर्यास्त शाम 5:55 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।