दैनिक पंचांग
पुणे पंचांग, गुरु, 13 जून 2030
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में सूर्योदय तड़के 5:57 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र स्वाती, योग परिघ और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:13 – दोपहर 3:53 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:57
- सूर्यास्त
- रात 7:11
- तिथि
- द्वादशी · सुबह 10:57 तक
- नक्षत्र
- स्वाती · सुबह 7:43 तक
- योग
- परिघ
- करण
- बालव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 2:13 – दोपहर 3:53
- यमगंड
- तड़के 5:57 – सुबह 7:36
- गुलिक काल
- सुबह 9:16 – सुबह 10:55
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:01 – दोपहर 12:49
- अमृत काल
- सुबह 11:45 – दोपहर 1:24
आज पुणे में
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में सूर्योदय तड़के 5:57 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि द्वादशी, नक्षत्र स्वाती, योग परिघ और करण बालव है। राहु काल दोपहर 2:13 – दोपहर 3:53 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल पुणे के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 14 जून 2030 | त्रयोदशी | अनुराधा | सुबह 10:55 – दोपहर 12:34 |
| शनि, 15 जून 2030 | पूर्णिमा | ज्येष्ठा | सुबह 9:16 – सुबह 10:55 |
| रवि, 16 जून 2030 | प्रतिपदा | मूल | शाम 5:33 – रात 7:12 |
| सोम, 17 जून 2030 | द्वितीया | पूर्वाषाढ़ा | सुबह 7:37 – सुबह 9:16 |
| मंगल, 18 जून 2030 | तृतीया | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 3:54 – शाम 5:33 |
| बुध, 19 जून 2030 | चतुर्थी | श्रवण | दोपहर 12:35 – दोपहर 2:15 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि द्वादशी है; सुबह 10:57 तक।
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र स्वाती है; सुबह 7:43 तक।
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में राहु काल कब है?
पुणे में राहु काल दोपहर 2:13 – दोपहर 3:53 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 13 जून 2030 को पुणे में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:57 और सूर्यास्त रात 7:11 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।