दैनिक पंचांग
पुणे पंचांग, शुक्र, 29 मार्च 2030
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में सूर्योदय सुबह 6:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र श्रवण, योग शिव और करण बव है। राहु काल सुबह 11:07 – दोपहर 12:39 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:31
- सूर्यास्त
- शाम 6:47
- तिथि
- एकादशी · रात 12:35 तक
- नक्षत्र
- श्रवण · शाम 6:06 तक
- योग
- शिव
- करण
- बव
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 11:07 – दोपहर 12:39
- यमगंड
- दोपहर 3:43 – शाम 5:15
- गुलिक काल
- सुबह 8:03 – सुबह 9:35
- अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 12:08 – दोपहर 12:56
- अमृत काल
- दोपहर 1:25 – दोपहर 2:57
आज पुणे में
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में सूर्योदय सुबह 6:31 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र श्रवण, योग शिव और करण बव है। राहु काल सुबह 11:07 – दोपहर 12:39 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल पुणे के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 30 मार्च 2030 | द्वादशी | धनिष्ठा | सुबह 9:34 – सुबह 11:07 |
| रवि, 31 मार्च 2030 | त्रयोदशी | शतभिषा | शाम 5:15 – शाम 6:47 |
| सोम, 1 अप्रैल 2030 | चतुर्दशी | पूर्वा भाद्रपद | सुबह 8:01 – सुबह 9:33 |
| मंगल, 2 अप्रैल 2030 | अमावस्या | उत्तरा भाद्रपद | दोपहर 3:43 – शाम 5:15 |
| बुध, 3 अप्रैल 2030 | प्रतिपदा | रेवती | दोपहर 12:38 – दोपहर 2:10 |
| गुरु, 4 अप्रैल 2030 | द्वितीया | अश्विनी | दोपहर 2:10 – दोपहर 3:43 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि एकादशी है; रात 12:35 तक।
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र श्रवण है; शाम 6:06 तक।
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में राहु काल कब है?
पुणे में राहु काल सुबह 11:07 – दोपहर 12:39 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 29 मार्च 2030 को पुणे में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:31 और सूर्यास्त शाम 6:47 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।