दैनिक पंचांग
पुदुच्चेरी पंचांग, मंगल, 22 जनवरी 2030
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में सूर्योदय सुबह 6:35 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र मघा, योग आयुष्मान और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:42 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:35
- सूर्यास्त
- शाम 6:08
- तिथि
- तृतीया · रात 7:29 तक
- नक्षत्र
- मघा · शाम 5:45 तक
- योग
- आयुष्मान
- करण
- वणिज
- वार
- मंगलवार
- राहु काल
- दोपहर 3:15 – शाम 4:42
- यमगंड
- सुबह 9:29 – सुबह 10:55
- गुलिक काल
- दोपहर 12:22 – दोपहर 1:48
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:53 – दोपहर 12:41
- अमृत काल
- सुबह 8:45 – सुबह 10:12
आज पुदुच्चेरी में
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में सूर्योदय सुबह 6:35 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि तृतीया, नक्षत्र मघा, योग आयुष्मान और करण वणिज है। राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:42 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल पुदुच्चेरी के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| बुध, 23 जनवरी 2030 | चतुर्थी | पूर्वा फाल्गुनी | दोपहर 12:22 – दोपहर 1:49 |
| गुरु, 24 जनवरी 2030 | पंचमी | उत्तरा फाल्गुनी | दोपहर 1:49 – दोपहर 3:16 |
| शुक्र, 25 जनवरी 2030 | षष्ठी | हस्त | सुबह 10:56 – दोपहर 12:23 |
| शनि, 26 जनवरी 2030 | सप्तमी | चित्रा | सुबह 9:29 – सुबह 10:56 |
| रवि, 27 जनवरी 2030 | अष्टमी | स्वाती | शाम 4:44 – शाम 6:10 |
| सोम, 28 जनवरी 2030 | नवमी | विशाखा | सुबह 8:02 – सुबह 9:29 |
सामान्य प्रश्न
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि तृतीया है; रात 7:29 तक।
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र मघा है; शाम 5:45 तक।
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में राहु काल कब है?
पुदुच्चेरी में राहु काल दोपहर 3:15 – शाम 4:42 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
मंगल, 22 जनवरी 2030 को पुदुच्चेरी में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:35 और सूर्यास्त शाम 6:08 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।