दैनिक पंचांग
मैसूर पंचांग, गुरु, 12 जून 2031
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में सूर्योदय तड़के 5:58 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग विष्कम्भ और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:35 है।
- सूर्योदय
- तड़के 5:58
- सूर्यास्त
- शाम 6:48
- तिथि
- अष्टमी · रात 7:24 तक
- नक्षत्र
- पूर्वा भाद्रपद · रात 7:45 तक
- योग
- विष्कम्भ
- करण
- बालव
- वार
- गुरुवार
- राहु काल
- दोपहर 1:59 – दोपहर 3:35
- यमगंड
- तड़के 5:58 – सुबह 7:34
- गुलिक काल
- सुबह 9:10 – सुबह 10:46
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:51 – दोपहर 12:39
- अमृत काल
- सुबह 11:35 – दोपहर 1:11
आज मैसूर में
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में सूर्योदय तड़के 5:58 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि अष्टमी, नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद, योग विष्कम्भ और करण बालव है। राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:35 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल मैसूर के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शुक्र, 13 जून 2031 | नवमी | उत्तरा भाद्रपद | सुबह 10:47 – दोपहर 12:23 |
| शनि, 14 जून 2031 | दशमी | रेवती | सुबह 9:11 – सुबह 10:47 |
| रवि, 15 जून 2031 | एकादशी | अश्विनी | शाम 5:12 – शाम 6:49 |
| सोम, 16 जून 2031 | द्वादशी | भरणी | सुबह 7:35 – सुबह 9:11 |
| मंगल, 17 जून 2031 | त्रयोदशी | कृत्तिका | दोपहर 3:37 – शाम 5:13 |
| बुध, 18 जून 2031 | चतुर्दशी | रोहिणी | दोपहर 12:24 – दोपहर 2:00 |
सामान्य प्रश्न
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि अष्टमी है; रात 7:24 तक।
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद है; रात 7:45 तक।
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में राहु काल कब है?
मैसूर में राहु काल दोपहर 1:59 – दोपहर 3:35 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
गुरु, 12 जून 2031 को मैसूर में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय तड़के 5:58 और सूर्यास्त शाम 6:48 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।