दैनिक पंचांग
मैसूर पंचांग, शुक्र, 22 जून 2029
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में सूर्योदय सुबह 6:00 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र स्वाती, योग परिघ और करण वणिज है। राहु काल सुबह 10:49 – दोपहर 12:25 है।
- सूर्योदय
- सुबह 6:00
- सूर्यास्त
- शाम 6:50
- तिथि
- एकादशी · शाम 6:34 तक
- नक्षत्र
- स्वाती · रात 8:00 तक
- योग
- परिघ
- करण
- वणिज
- वार
- शुक्रवार
- राहु काल
- सुबह 10:49 – दोपहर 12:25
- यमगंड
- दोपहर 3:38 – शाम 5:14
- गुलिक काल
- सुबह 7:36 – सुबह 9:12
- अभिजीत मुहूर्त
- सुबह 11:53 – दोपहर 12:41
- अमृत काल
- दोपहर 1:13 – दोपहर 2:50
आज मैसूर में
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में सूर्योदय सुबह 6:00 पर होता है। सूर्योदय पर तिथि एकादशी, नक्षत्र स्वाती, योग परिघ और करण वणिज है। राहु काल सुबह 10:49 – दोपहर 12:25 है।
ये समय कैसे निकाले जाते हैं
इस पृष्ठ का सूर्योदय, सूर्यास्त और सभी काल मैसूर के अक्षांश-देशांतर के लिए, लाहिड़ी अयनांश के साथ दृक् गणित से निकाले गए हैं। पंचांग का दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक होता है; समाप्ति समय के साथ दिखाई गई तिथि या नक्षत्र उसी दिन बदल जाता है। राहु काल, यमगंड और गुलिक काल वार के अनुसार दिनमान का आठवाँ भाग हैं।
| तिथि (दिनांक) | तिथि | नक्षत्र | राहु काल |
|---|---|---|---|
| शनि, 23 जून 2029 | द्वादशी | विशाखा | सुबह 9:12 – सुबह 10:49 |
| रवि, 24 जून 2029 | त्रयोदशी | अनुराधा | शाम 5:14 – शाम 6:51 |
| सोम, 25 जून 2029 | चतुर्दशी | ज्येष्ठा | सुबह 7:37 – सुबह 9:13 |
| मंगल, 26 जून 2029 | पूर्णिमा | मूल | दोपहर 3:38 – शाम 5:15 |
| बुध, 27 जून 2029 | प्रतिपदा | पूर्वाषाढ़ा | दोपहर 12:26 – दोपहर 2:02 |
| गुरु, 28 जून 2029 | द्वितीया | उत्तराषाढ़ा | दोपहर 2:03 – दोपहर 3:39 |
सामान्य प्रश्न
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में कौन सी तिथि है?
सूर्योदय पर तिथि एकादशी है; शाम 6:34 तक।
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में कौन सा नक्षत्र है?
सूर्योदय पर नक्षत्र स्वाती है; रात 8:00 तक।
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में राहु काल कब है?
मैसूर में राहु काल सुबह 10:49 – दोपहर 12:25 है। नए काम शुरू करने के लिए इसे पारंपरिक रूप से टाला जाता है।
शुक्र, 22 जून 2029 को मैसूर में सूर्योदय कब है?
सूर्योदय सुबह 6:00 और सूर्यास्त शाम 6:50 पर है।
शहरों के बीच पंचांग समय अलग क्यों होता है?
सूर्योदय और दैनिक काल अक्षांश-देशांतर पर निर्भर हैं; तिथि और नक्षत्र एक ही क्षण बदलते हैं, पर स्थानीय समय अलग होता है।
कौन सा अयनांश उपयोग होता है?
अधिकांश भारतीय पंचांगों द्वारा अपनाया गया लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश।
क्या दूसरी तिथि देख सकते हैं?
हाँ। आगे के दिनों की तालिका देखें या पंचांग टूल में कोई भी तिथि और स्थान चुनें।
क्या यह दृक् गणित है या वाक्य?
ये पृष्ठ दृक् गणित का उपयोग करते हैं। पंचांग टूल में कई तमिल मंदिरों द्वारा अपनाई गई वाक्य पद्धति भी उपलब्ध है।